पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में अमरिंदर सिंह का BJP नेतृत्व द्वारा उनकी सलाह नहीं लिए जाने का मुद्दा उठाना पंजाब BJP की आंतरिक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की राजनीति में करीब छह दशक का अनुभव रखने के बावजूद BJP राज्य से जुड़े मामलों में उनसे सलाह नहीं लेती। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और BJP राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कैप्टन के लंबे समय से कांग्रेस में जाने की चर्चा हो रही है। हाल ही में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कैप्टन को अंकल कह कर उनकी तारीफ की थी। इसके बाद कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर की वापसी की खबरों ने जोर पकड़ा था।
अमरिंदर सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके और उनके साथियों के पास पंजाब की चुनावी राजनीति का करीब 60 साल का अनुभव है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने राज्य को कई राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजरते देखा है। उनके मुताबिक, उनकी अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि पार्टी उनके अनुभव और राय को सुने तथा उसे महत्व दे। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में BJP के राज्य से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को राजनीति में आए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है, जबकि उन्होंने करीब छह दशकों से पंजाब की राजनीति को करीब से देखा है।
“पार्टी को सलाह देना मेरी जिम्मेदारी”
कैप्टन ने स्पष्ट किया कि पंजाब के बारे में अपनी राय रखना BJP छोड़ने का संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सदस्य के तौर पर पंजाब की स्थिति को लेकर अपनी बात पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अपनी राय रखने का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि वह BJP से अलग होने वाले हैं।अमरिंदर सिंह ने 2022 में अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का BJP में विलय किया था। इससे पहले उन्होंने 2021 में कांग्रेस छोड़ दी थी। मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने और कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेदों के बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई थी।
कांग्रेस में वापसी के सवाल पर क्या बोले?
BJP में अपनी उपेक्षा की शिकायत के बाद जब उनसे कांग्रेस में वापसी की संभावनाओं के बारे में पूछा गया तो अमरिंदर सिंह ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि वह BJP छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों में बदलाव होते रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद वह अकाली दल में गए थे और बाद में कांग्रेस में लौटे थे।उन्होंने हालांकि साफ किया कि फिलहाल वह BJP छोड़ने पर विचार नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, किसी मुद्दे पर पार्टी के सामने अपनी राय रखना और पार्टी छोड़ना दो अलग बातें हैं।
उम्र को लेकर भी दिया जवाब
84 वर्ष की उम्र के बावजूद सक्रिय राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर अमरिंदर सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का उदाहरण दिया। उन्होंने संकेत दिया कि उम्र अपने आप में राजनीतिक सक्रियता समाप्त होने का पैमाना नहीं है। यह टिप्पणी उन्होंने पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की स्मृति में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान की।इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी अमरिंदर सिंह के फिर से पंजाब का मुख्यमंत्री बनने की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा पूर्व क्रिकेटर कपिल देव, सैयद किरमानी और मदन लाल समेत कई लोग मौजूद थे।
2027 के चुनाव से पहले सामने आया बयान
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में अमरिंदर सिंह का BJP नेतृत्व द्वारा उनकी सलाह नहीं लिए जाने का मुद्दा उठाना पंजाब BJP की आंतरिक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध बयान में अमरिंदर सिंह ने पार्टी छोड़ने या किसी दूसरे दल में जाने की घोषणा नहीं की है।उनके बयान का मूल मुद्दा यह है कि पंजाब से जुड़े राजनीतिक फैसलों में उनके लंबे अनुभव का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। यह शिकायत उन्होंने पार्टी से अलग होने की घोषणा के तौर पर नहीं, बल्कि BJP सदस्य के रूप में अपनी राय रखने के अधिकार और जिम्मेदारी के संदर्भ में रखी है।