पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप कार्यालय पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी ने राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। मान का आरोप है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उनकी सरकार को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
मंगलवार को सीबीआई की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए मान ने कहा कि ये छापेमारी भाजपा की "राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की बेताबी" का संकेत है और उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने अपनी एजेंसियों को पंजाब के निर्वाचित मुख्यमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल किया है।

मुख्यमंत्री मान ने कहा, “बीजेपी ने पंजाब चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। मेरे कैंप कार्यालय में सीबीआई ने छापा मारा। अब पंजाब में ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग पंजाब सरकार और मुझे बदनाम करने के लिए किया जाएगा। जनता से मिल रहे प्यार और समर्थन को देखकर बीजेपी घबरा गई है।”
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उन्होंने बीजेपी पर किसानों के विरोध प्रदर्शन से लेकर राज्य के जल और पंजाब विश्वविद्यालय के मुद्दे तक, पंजाब को बार-बार दरकिनार करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके कैंप कार्यालय में सीबीआई की कार्रवाई आगामी चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों का हिस्सा थी। मुख्यमंत्री मान ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में उन्हें मिल रहे समर्थन से बीजेपी परेशान है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी उनकी बात का समर्थन किया और इस छापेमारी को चुनाव से पहले बीजेपी की "घबराहट" का नतीजा बताया। केरावाल ने कहा, "बीजेपी चुनाव लड़कर पंजाब नहीं जीत सकती, इसलिए वह ईडी और सीबीआई की मदद से चुनाव लड़ना चाहती है। लेकिन पंजाबियों ने अपना मन बना लिया है और आने वाले चुनावों में वे भाजपा की सीबीआई छापेमारी का जवाब भगवंत मान को 100 से अधिक सीटें देकर और उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाकर देंगे।"
पंजाब आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अमन अरोड़ा ने भी इन छापों को 2027 के चुनावों से जोड़ा और आरोप लगाया कि भाजपा, AAP सरकार के कामकाज से असहज है। अरोड़ा ने कहा, “आज सीबीआई ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप कार्यालय पर छापा मारा है। इसके साथ ही भाजपा ने 2027 के चुनावों के लिए अपना अभियान शुरू कर दिया है।”

बीजेपी ने आरोपों को किया खारिज

बीजेपी ने भगवंत मान के राजनीतिक बदले के आरोपों को खारिज कर दिया है। बीजेपी नेता तरुण चुघ ने कहा कि CBI को केंद्र सरकार ने मनमाने ढंग से पंजाब नहीं भेजा है, बल्कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद एजेंसी जांच कर रही है। चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग भी की। उन्होंने कहा कि अगर आरोप गलत हैं तो जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा और अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसका जवाब जांच में सामने आना चाहिए। बीजेपी का कहना है कि जांच को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने भी मान सरकार को घेरा

पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी CBI की कार्रवाई को लेकर भगवंत मान सरकार पर हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री के सेक्टर-2 स्थित कैंप ऑफिस को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह वही जगह है जहां से दिल्ली से पंजाब सरकार को नियंत्रित किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। बाजवा ने कहा कि जिस जगह को पंजाब की सत्ता के केंद्र के रूप में देखा जाता था, वही अब CBI की जांच के दायरे में है। उन्होंने मामले में सच्चाई सामने लाने की मांग की। शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने भी कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि CBI की जांच से सत्ता के गलियारों में चल रही कथित गड़बड़ियों का सच सामने आना चाहिए।

CBI ने आठ ठिकानों पर की छापेमारी

CBI ने मंगलवार को चंडीगढ़ और पंजाब के अलग-अलग शहरों में आठ स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित मुख्यमंत्री का कैंप ऑफिस, मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन का संगरूर के घराचों गांव स्थित आवास और मोहाली में उनके एक करीबी रिश्तेदार का ठिकाना भी शामिल है। इसके अलावा CBI की टीमें मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में भी पहुंचीं। जांच एजेंसी ने तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की है। इनकी जांच की जा रही है ताकि कथित रिश्वतखोरी, सरकारी फैसलों में हस्तक्षेप और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूतों का पता लगाया जा सके।

मुख्यमंत्री के OSD पर FIR

CBI ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुमन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR में राजबीर घुमन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी मामले में शामिल किया गया है। 
CBI का आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों, खासकर IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग तथा ट्रांसफर, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंस, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को प्रभावित करने की कोशिश की। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या सरकारी आदेशों और नीतियों के ड्राफ्ट आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले निजी लोगों तक पहुंचाए गए थे।

मामला सिर्फ CBI रेड तक सीमित नहीं

इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि CBI की कार्रवाई के साथ-साथ पंजाब सरकार और केंद्र की जांच एजेंसियों के बीच टकराव सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। एक तरफ CBI हाईकोर्ट के आदेश और ED की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। दूसरी तरफ भगवंत मान सरकार इस जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। CBI के आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और किसी भी आरोपी को अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है।

2027 से पहले बढ़ेगा सियासी तापमान?

पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस पर CBI की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार की जांच को सीधे चुनावी राजनीति के केंद्र में ला दिया है। AAP इसे केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का उदाहरण बता रही है, जबकि बीजेपी इसे भ्रष्टाचार के आरोपों की कानूनी जांच बता रही है। यानी आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में भ्रष्टाचार बनाम केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा बड़ा चुनावी नैरेटिव बन सकता है।