पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्टों में यह सूत्रों के हवाले से कहा गया है। उनके उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान जल्द होने की संभावना है। सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज थीं।

पंजाब कांग्रेस में कई महीनों से चल रही गुटबाजी के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे की ख़बर आई है। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ यह बदलाव कांग्रेस के लिए अहम संगठनात्मक घटनाक्रम माना जा रहा है। रिपोर्ट है कि कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला कर लिया था। इसके बाद वडिंग के इस्तीफे की खबर सामने आई। कांग्रेस अब जल्द ही उनके उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान कर सकती है। पार्टी के भीतर विजय इंदर सिंगला, सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह, गुरजीत सिंह औजला और सुखबिंदर सिंह सरकारिया समेत कई नामों पर चर्चा चल रही है।

यह बदलाव तब हुआ है जब पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होना है और कांग्रेस को आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ चुनावी तैयारी तेज करनी है।
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वडिंग को लेकर खींचतान थी

राजा वडिंग के नेतृत्व को लेकर पंजाब कांग्रेस में विवाद नया नहीं है। इस साल जून-जुलाई में कांग्रेस ने पंजाब संगठन को लेकर नेताओं से विचार-विमर्श किया था। पार्टी के पर्यवेक्षकों की एक टीम ने भी प्रदेश के नेताओं से बातचीत की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उस प्रक्रिया में पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए प्रमुखता से सामने आया था।

इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान ने 1 जुलाई 2026 को राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फ़ैसला किया था। साथ ही चन्नी को पार्टी की कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। हाईकमान की कोशिश थी कि संगठन की कमान वडिंग के पास रहे और चुनावी अभियान में चन्नी की भूमिका बढ़ाई जाए। लेकिन यह फार्मूला प्रदेश कांग्रेस के भीतर विवाद को पूरी तरह खत्म नहीं कर सका। वडिंग और चन्नी के समर्थकों के बीच खींचतान जारी रही।

चन्नी कैंप लगातार बदलाव की मांग कर रहा था

राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फ़ैसले के बाद कांग्रेस के भीतर एक धड़ा इससे संतुष्ट नहीं था। पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने नेतृत्व में बदलाव की मांग उठाई। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा को लेकर भी उस समय ऐसी खबरें आईं कि वे मौजूदा व्यवस्था से सहमत नहीं थे।

जुलाई में पार्टी के भीतर असंतोष सार्वजनिक भी हुआ। फिरोजपुर के सांसद शेर सिंह घुबाया ने भी जुलाई में वडिंग के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। हालांकि, वडिंग समर्थक नेताओं ने इसका विरोध किया और घुबाया के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी।

अगस्त में भी वडिंग ने साफ कहा था कि वह खुद इस्तीफा नहीं देंगे और अगर पार्टी हाईकमान उन्हें बदलना चाहता है तो वह उसके फैसले को स्वीकार करेंगे। अब हाईकमान के नेतृत्व परिवर्तन के फैसले के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया है।

सचिन पायलट की एंट्री के बाद बदला माहौल

पंजाब कांग्रेस में मौजूदा बदलाव को सचिन पायलट की नियुक्ति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। 5 सितंबर को कांग्रेस ने राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पार्टी महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया था। उन्होंने भूपेश बघेल की जगह ली थी। बघेल को असम का प्रभारी बनाया गया।

पायलट की नियुक्ति तब हुई जब पंजाब कांग्रेस में वडिंग और चन्नी खेमे के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। कांग्रेस के भीतर पायलट की नियुक्ति को पंजाब संगठन में नए सिरे से बातचीत और समन्वय की कोशिश के तौर पर देखा गया।
पायलट ने प्रदेश के अलग-अलग नेताओं से बातचीत शुरू की। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और जिला स्तर के पदाधिकारियों से संगठन की स्थिति पर फीडबैक लिया। इस फीडबैक के आधार पर तैयार रिपोर्ट पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा हुई।

वडिंग और पायलट की मुलाकात भी हुई थी

पायलट की नियुक्ति के बाद राजा वडिंग ने उनसे दिल्ली में मुलाकात की थी। उस समय वडिंग ने कहा था कि पार्टी में किसी तरह की नाराजगी नहीं है और सभी नेता आने वाले समय में एक मंच पर आकर चुनाव लड़ेंगे। वडिंग ने कहा था कि कुछ छोटे-मोटे मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सभी नेता एकजुट होकर पार्टी के लिए काम करेंगे। इसके बावजूद संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा जारी रही और अब वडिंग ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया है।

अब कौन बनेगा पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष?

राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल उनके उत्तराधिकारी को लेकर है। कांग्रेस के भीतर कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व मंत्री और मालवा क्षेत्र के प्रमुख नेता विजय इंदर सिंगला, गुरदासपुर से सांसद और पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा, जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व मंत्री परगट सिंह, अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला और राजा सांसी से विधायक और पूर्व मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम शामिल हैं।
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वडिंग के बाद किस समीकरण पर जोर?

प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव केवल संगठनात्मक सवाल नहीं है। पंजाब की राजनीति में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में मालवा, माझा और दोआबा के क्षेत्रीय संतुलन के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

यही कारण है कि जाट सिख और हिंदू नेताओं के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए कोई आधिकारिक मानदंड सार्वजनिक नहीं किया है।

वडिंग 2022 के बाद बने थे प्रदेश अध्यक्ष

राजा वडिंग ने अप्रैल 2022 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाला था। यह वह समय था जब 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी नेतृत्व के बीच गंभीर मतभेद हुए थे। बाद में अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया और चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया।
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लेकिन चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर सकी। इसके बाद वडिंग को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी दी गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में वडिंग खुद लुधियाना से लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन में उनके नेतृत्व को लेकर विवाद बना रहा।

विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं। इसलिए नए अध्यक्ष के पास संगठन को चुनावी मोड में लाने, टिकट की दावेदारी से पहले नेताओं में तालमेल बनाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए सीमित समय होगा। फिलहाल कांग्रेस हाईकमान की ओर से नए पंजाब प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा का इंतजार है।