राजस्थान में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर फिर से हमला किया है। उन्होंने कहा कि पायलट अब तक अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं, 'भूलना और माफ करना नहीं सीख पाए हैं, इसलिए उनके बीच विवाद अभी भी जारी है।
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट विवाद फिर से तब गरमा गया है जब पूर्व सीएम गहलोत ने 2020 की बगावत की याद दिला कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने पायलट की 2020 की बगावत को लेकर सवाल उठाए और कहा कि पायलट अब तक अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं। गहलोत ने हाल ही में अपने ताज़ा बयान में कहा है कि पायलट 'भूलना और माफ करना' नहीं सीख पाए हैं, इसलिए उनके बीच विवाद अभी भी जारी है। तो सवाल है कि गहलोत आख़िर अब कौन से विवाद की बात कर रहे हैं? बगावत के ख़त्म हुए तीन साल हो गए और फिलहाल कांग्रेस की सत्ता भी नहीं है तो फिर गहलोत अभी अचानक यह बात कहकर क्या साधना चाहते हैं?
इन सवालों के जवाब बाद में, पहले यह जान लीजिए कि आख़िर अशोक गहलोत ने क्या-क्या कहा है और किस संदर्भ में वह ये बातें कह रहे हैं।
अशोक गहलोत ने क्या कहा?
अशोक गहलोत ने 2020 की घटना को याद करते हुए कहा है कि उस समय बीजेपी, अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान ने उनकी सरकार गिराने की पूरी कोशिश की थी। 'मानेसर' पर जोर देते उन्होंने आरोप लगाया कि बागी विधायक मानेसर से धर्मेंद्र प्रधान के घर जाते थे और वहां अमित शाह भी उनसे मिलते थे। गहलोत ने कहा, 'वे बड़ी साजिश रच रहे थे, लेकिन हमने उन्हें बेनकाब कर दिया। राजस्थान बच गया, हमें इस बात पर गर्व है।' गहलोत ने इसके बाद 2022 की घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि जब हाईकमान पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश कर रहा था, तब 100 विधायकों ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा, 'विधायकों ने कहा कि किसी भी एक को मुख्यमंत्री बना दो, लेकिन पायलट को नहीं। क्योंकि पायलट ने ही उन्हें मानेसर ले जाकर बगावत करवाई थी।' ऐसा उन्होंने लोगों की यादें ताज़ा करने और शायद पार्टी आलाकमान के सामने यह बात रखने के लिए किया कि पार्टी नेता पायलट को पसंद नहीं करते।
'पायलट समझते क्यों नहीं'
गहलोत ने यह भी कहा कि आम तौर पर जब पार्टी में मुख्यमंत्री बदला जाता है तो विधायक नए सीएम के पास चले जाते हैं, लेकिन राजस्थान में 2022 की सीएलपी बैठक में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने तर्क रखा, 'भारत के इतिहास में जब भी आलाकमान मुख्यमंत्री बदलने का फ़ैसला करता है तो 90% विधायक पुराने सीएम को छोड़कर नए सीएम के पास चले जाते हैं... वे उनके नेतृत्व में मंत्री बनना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि नए सीएम उनके काम करेंगे। लेकिन क्या वजह थी कि विधायक उनके पास नहीं गए?... सचिन पायलट को भी यह समझना चाहिए, अब उन्हें राजनीति में आए हुए लगभग 15-20 साल हो चुके हैं...।'अशोक गहलोत ने तो यह भी कहा कि तब वह सचमुच उस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते थे, पर ऐसा नहीं हो सका।
गहलोत ने पायलट को 'बच्चा' बताते हुए कहा, 'मैं उन्हें बचपन से जानता हूं। उनके घर जाता था। वे तब 2-3 साल के बच्चे थे। मैं अब भी उन्हें बच्चा ही समझता हूं। लेकिन मुझे नहीं पता कौन उन्हें राजनीति में गलत सलाह दे रहा है।'
गहलोत ने यह भी शिकायत की कि उन्होंने पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद की थी, लेकिन पायलट ने कभी इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। गहलोत ने कहा, "उन्होंने उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया और मैंने भी उन्हें केंद्रीय मंत्री बनने में मदद की, लेकिन उन्होंने कभी यह बात खुलकर नहीं कही और मुझे इसी बात की शिकायत है। वह जानते हैं कि मैंने उनकी मदद की थी... अगर वह अपने दोस्तों से भी यह कहते कि 'अशोक गहलोत ने मेरी मदद की', तो मेरा दिल भर आता। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं कहा?" गहलोत ने इशारा किया कि इसी व्यवहार की वजह से आखिरकार उनके बीच मतभेद पैदा हुए।
अब क्यों दे रहे हैं गहलोत यह बयान?
अशोक गहलोत के इस बयान के पीछे आलाकमान को संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस ने भी पार्टी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि गहलोत हाईकमान को संदेश देना चाहते हैं कि राजस्थान में पायलट को कोई बड़ी जिम्मेदारी न दी जाए। वे 2020 की बगावत और 2022 के विरोध को बार-बार याद दिलाकर पायलट के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक पार्टी नेता ने कहा, "बीजेपी में वसुंधरा राजे की तरह गहलोत आसानी से हथियार डालने को तैयार नहीं हैं। गहलोत, पायलट को उस 'बड़ी गलती' के लिए माफ़ नहीं कर सकते, जिसे वे अपनी ही सरकार को गिराने की कोशिश मानते हैं- खासकर तब जब पायलट डिप्टी सीएम और पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रमुख थे।"
कहा जा रहा है कि गहलोत की ये टिप्पणियां हमले का संकेत हैं और उनका असली मकसद राजस्थान में पायलट को किसी बड़े पद पर नियुक्त करने की किसी भी योजना पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करना है।
पायलट गुट का जवाब
हालाँकि गहलोत के इन आरोपों पर सचिन पायलट की ओर से कोई जवाब तो नहीं आया है, लेकिन पायलट के समर्थकों ने गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि 2020 में पायलट और उनके समर्थकों को गहलोत सरकार में लगातार तंग किया जा रहा था और उन्हें किनारे किया जा रहा था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने सवाल किया कि अगर विद्रोही विधायक ग़लत थे तो 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट क्यों दिए गए? कुछ विद्रोहियों को 2024 में सांसद भी बनाया गया। पायलट गुट का कहना है कि 2018 में कांग्रेस को 100 सीटों तक पहुंचाने का श्रेय पायलट की मेहनत को जाता है।राहुल गांधी के सामने दोनों साथ दिखे थे
अभी हाल ही में राहुल गांधी के अजमेर दौरे पर गहलोत और पायलट एक साथ दिखे थे। एक हफ़्ते पहले जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी अजमेर पहुँचे थे तो उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के बीच एकता की तारीफ़ करते हुए कहा था कि वे 'दूसरे सभी राज्यों के लिए एक बहुत अच्छा उदाहरण' हैं। जब राहुल तारीफ़ कर रहे थे तो डोटासरा और जूली के साथ ही गहलोत और पायलट भी खड़े थे।
तो अब फिर से विवाद तब सामने आ रहा है जब 2028 का विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है। 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी लड़ाई शुरू हो चुकी है। अब नज़र इस पर है कि कांग्रेस हाईकमान इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और सचिन पायलट इस मामले में क्या प्रतिक्रिया देते हैं। अशोक गहलोत के ताज़ा बयान से यह तो साफ़ हो ही गया है कि राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर से 'गहलोत बनाम पायलट' का नया अध्याय शुरू होना तय है।