बीजेपी के कार्यकर्ता राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने की तैयारी में हैं। आहत होने का कारण कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान है, जिसमें उन्होंने हमारे नॉन बायलॉजिकल प्रधानमंत्री के बाप का अपमान किया।
राहुल गाँधी ने नारा दिया Smash the patriarchy, वैसे तो ये नारा देशभर की लड़कियों के लिए था लेकिन जोश में आ गये खड़गे जी और उन्होंने सीधे नॉन बायोलॉजिकल महामानव के बाप को स्मैश कर दिया।
खड़गे बिहार के एक कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे। भीड़ से किसी ने आवाज़ लगाई “ मोदी नहीं जाएंगे।“ इस पर खड़गे ने ललकारते हुए कहा “जाना तो मोदी के बाप को भी होगा।“
देशभर के बीजेपी नेता इस बयान से आहत हैं और कार्यकर्ता भी गुस्से से उबल रहे हैं। मैं भी इस बयान की कड़ी निंदा करता हूँ। खड़गे उस आदमी को भेज रहे हैं, जो बेचारा कभी आया ही नहीं था।
मोदी प्रधानमंत्री बने। उसके बाद उनकी माँ अनगिनत कहानियों और संस्मरणों में आईं। नोटबंदी के दौरान एटीएम की लाइन में भी नज़र आईं। अक्सर सार्वजनिक सभाओं में माँ के संघर्षों का जिक्र करते हुए मोदी का गला रुंध आता था। लेकिन अपने बाप का जिक्र उन्होंने कहीं एक लाइन में भी नहीं किया।
बीजेपी की आईटी सेल ने आलू से सोना बनाने वाले मोदी के बयान की नकल करने वाली बाइट को बीच से काटकर उसे राहुल के नाम पर चिपका दिया। इसके बदले में कांग्रेस के आईटी सेल ने मोदीजी को पठान का बच्चा बना दिया। मोदीजी के वास्तविक बाप श्रीयुत दामोदर दास की एंट्री तब भी नहीं हुई।
बीजेपी या स्वयं मोदीजी की तरफ से पठान का बच्चा पर एतराज करते हुए ये नहीं कहा गया कि जब वो दामोदार दास जी के सुपत्र हैं तो फिर उन पर ऐसी भद्दी बात क्यों चिपकाई जा रही है।
सच पूछा जाये तो दामोदार दास जी भारतीय राजनीति के अनसंग हीरो हैं। जरा से सोचिये कि अगर गरीब माँ ने संघर्षों से बेटे का लानन-पालन किया, उसे मगरमच्छ पकड़ने दिया तो बाप ने भी तो चायवाला बनाया। अगर मोदीजी चायवाला नहीं होते तो क्या इस देश के प्रधानमंत्री होते? भाइयों के बयानों को सच मानें तो आखिर बचपन में मोदीजी घर से जो गहने लेकर भागे थे, उसमें भी तो बाप का पैसा लगा ही होगा।
फिर क्या कारण है कि मोदीजी अपने बाप का जरा भी जिक्र नहीं करते? वो भले ही नॉन बायोलॉजिकल हैं I
लेकिन बाप तो बायोलॉजिकल थे। क्या कारण है कि उन्होंने राहुल गाँधी के Smash the patriarchy कहने से पहले बाप को स्मैश कर दिया। देखा जाये तो मोदीजी असली फेमिनिस्ट हैं। वे चाहते तो ये बात कह सकते थे लेकिन इस सवाल पर उन्होंने कभी राजनीति भी नहीं की।
दामोदार दास जी के विषय में इतिहास मौन है। अब उनके जाने की बात सुनकर बीजेपी वाले आहत हैं। उनका आहत होना बनता है लेकिन पार्टी के लिए ये मौका है कि इसी बहाने वो पूरे देश को बताये कि दामोदर दास जी थे कौन? पाठ्यक्रम में इतने बदलाव हो रहे हैं और बीस से ज्यादा राज्यों में बीजेपी की सरकार है। क्या एक चैप्टर दामोदर दास जी पर नहीं रखा जा सकता?
बाप बिरादरी इस देश में हमेशा से उपेक्षित रही है। क्या अपने बापत्व को ललकारे जाने पर मोदीजी उसी तरह रील बनाएंगे जिस तरह ‘माँ को दी गई गाली’ के बाद बनाया था? इस दुनिया की तमाम गालियां मर्दवादी नज़रिये से आविष्कृत हैं और उनमें निशाना औरतों को बनाया जाता रहा है।
ज्यादा ताज्जुब ये है कि साउथ दिल्ली और साउथ बांबे की लड़कियां भी आजकल धड़ल्ले से माँ बहन की गालियां बकती हैं। इस घटना ने उन्हें मौका दिया है कि वो कुछ मौलिक गालियां इजाद करें और बाप भाई तक पहुंचे तो कुछ बराबरी का मामला बने।
भारतीय राजनीति एक तरह बाप निरपेक्ष है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि मोदीजी के बाप के सम्मान में बीजेपी कार्यकर्ताओं के मैदान में आने का असर क्या होता है।
(व्यंगकार राकेश कायस्थ की फेसबुक वॉल से साभार)