हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए ‘डॉ. निमो यादव’ और ‘नेहर हू’ X खातों को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। तो क्या अब सोशल मीडिया खातों पर अंधाधुंध ब्लॉकिंग आदेश रुकेगा?
दिल्ली हाई कोर्ट का एक्स खातों की ब्लॉकिंग पर फ़ैसला।
सोशल मीडिया खातों पर लगातार प्रतिबंध लगा रही केंद्र सरकार को ‘डॉ. निमो यादव’ मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। इसने सोमवार को दो वायरल पैरोडी अकाउंट ‘डॉ. निमो यादव’ और ‘नेहर हू’ को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। ‘डॉ. निमो यादव’ को प्रतीक शर्मा चलाते हैं और ‘नेहर हू’ को कुमार नयन चलाते हैं। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने कहा कि दोनों अकाउंट को पूरी तरह से तुरंत खोल दिया जाए। हालाँकि, ब्लॉकिंग आदेश में जिन खास ट्वीट्स को आपत्तिजनक बताया गया था, वे फिलहाल अस्थायी रूप से ब्लॉक रहेंगे और इनकी समीक्षा के बाद उनपर फ़ैसला लिया जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी एमईआईटीवाई ने मार्च 2026 में 12 एक्स खातों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। इनमें ‘डॉ. निमो यादव’ और ‘नेहर हू’ भी शामिल थे। सरकार ने आरोप लगाया कि इन खातों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक, विवादास्पद और गलत तस्वीरें, वीडियो तथा एआई से बने कंटेंट पोस्ट किए गए थे। एक्स कंपनी ने भी कोर्ट में बताया था कि ये खाते एमईआईटीवाई के निर्देश पर ब्लॉक किए गए थे।
एक्स ने क्या कहा?
एक्स ने जो आपत्ति जताने वाला पत्र लिखा और जो हलफनामा दिया, उसमें साफ़ लिखा कि इन खातों के ज़्यादातर कंटेंट धारा 69ए के दिए गए आधारों में नहीं आते। इसलिए पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना गलत है और यह नियम के अनुसार नहीं है। एक्स ने कहा, "पोस्ट को ब्लॉक नहीं कर, अकाउंट को ही ब्लॉक करना सही नहीं है। यह क़ानून के तहत अनिवार्य 'सबसे कम दखल देने वाला उपाय' नहीं है।"
एक्स की ओर से कहा गया कि अकाउंट होल्डर्स को सुनवाई का कोई मौक़ा नहीं दिया गया। ब्लॉकिंग आदेश में यह नहीं दिखाया गया कि किस व्यक्ति की सामग्री को ब्लॉक किया जा रहा है और उसके लिए क्या ठोस प्रयास किए गए।
याचिकाकर्ताओं की दलील
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार प्रतीक शर्मा की तरफ से वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में कहा, 'खाते 19 मार्च को ब्लॉक हुए, लेकिन सरकार की तरफ़ से कोई नोटिस या सुनवाई का मौक़ा नहीं दिया गया। उन्होंने दलील दी कि पूरा अकाउंट ब्लॉक करना गलत है, केवल आपत्तिजनक ट्वीट को ब्लॉक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दलील दी कि सरकार ने पहले अकाउंट ब्लॉक किया, फिर कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद नोटिस भेजा। यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में मूल अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कुमार नयन की याचिका पर भी सुनवाई हुई।केंद्र सरकार की दलील
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल यानी एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को रिव्यू कमिटी के सामने पेश होने के लिए ईमेल भेजे गए थे। उन्होंने आईटी एक्ट के ब्लॉकिंग रूल्स का हवाला दिया और कहा कि सुनवाई का मौक़ा दिया जा रहा है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश दिया कि दोनों खातों को तुरंत बहाल किया जाए। ब्लॉकिंग आदेश में बताए गए खास ट्वीट्स अस्थायी रूप से ब्लॉक रहेंगे। याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा और कुमार नयन को एमईआईटीवाई की रिव्यू कमिटी के सामने पेश होना होगा। कमिटी में सिद्धांतों का पालन करते हुए यह तय किया जाएगा कि वे ट्वीट्स सही तरीके से ब्लॉक किए गए हैं या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आगे कोई आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की गई तो सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकेगी।क्यों अहम है यह फ़ैसला?
यह फ़ैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि पूरा अकाउंट ब्लॉक करना उचित नहीं है जब तक कि केवल कुछ ट्वीट ही विवादास्पद हों। अभी दोनों को रिव्यू कमिटी में जाना होगा, जहां एमईआईटीवाई को यह साबित करना होगा कि ब्लॉकिंग सही थी।
यह मामला एक्स प्लेटफॉर्म पर व्यंग्य और आलोचना की आजादी को लेकर काफी चर्चा में रहा है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाता है या नहीं, और रिव्यू कमिटी क्या फ़ैसला लेती है। इसके अलावा, क्या अब आगे अन्य सोशल मीडिया खातों पर लगातार हो रही कार्रवाई पर लगाम लगेगी, इस पर भी लोगों की नज़र रहेगी।