मणिपुर में एक बार फिर हिंसा की चपेट में है। 7 अप्रैल 2026 को बिशनुपुर जिले के त्रोंगलाओबी (ट्रॉन्गलाओबी) गांव में हुए बम विस्फोट और उसके बाद हुए में कुल पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें दो नाबालिग बच्चे शामिल हैं। राज्य में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। मेइरा पाइबी समूहों ने घाटी क्षेत्रों में पांच दिन का बंद बुलाया है और 25 अप्रैल तक दोषियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।
घटना की शुरुआत 7 अप्रैल की रात करीब 1 बजे हुई, जब त्रोंगलाओबी गांव में संदिग्ध कुकी-जो मिलिशिया (Kuki-Zo militants) द्वारा चलाए गए बम या प्रोजेक्टाइल ने एक घर को निशाना बनाया। इस हमले में मैतेई समुदाय के दो बच्चों की मौत हो गई। मृतकों में एक पांच महीने का नवजात शामिल था। दोनों बच्चे एक बीएसएफ जवान के थे। उनकी मां भी इस हमले में घायल हुईं। पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, हमलावर अभी तक अज्ञात हैं।
इस घटना के बाद मैतेई समुदाय के लोगों ने भारी प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों के कैंप (बीएसएफ और सीआरपीएफ कैंप) पर हमला बोल दिया। अफवाहों का सहारा लेकर कुछ लोग कैंप में घुसने और हथियार लूटने की कोशिश करने लगे। स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख सीआरपीएफ जवानों ने फायरिंग की, जिसमें तीन स्थानीय निवासी मारे गए। इस प्रकार कुल पांच मौतें (दो बच्चे + तीन प्रदर्शनकारी) हो चुकी हैं।
ताज़ा ख़बरें
प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं, जिससे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की जांच भी प्रभावित हो रही है। इम्फाल वेस्ट समेत घाटी के कई इलाकों में टॉर्च रैली निकाली गई और प्रतिबंधात्मक आदेशों को तोड़ते हुए प्रदर्शन किए गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सड़कों पर झड़पें हुईं।
मेइरा पाइबी (महिलाओं की संगठन) समूहों ने पूरे राज्य में पांच दिन का बंद घोषित कर दिया है। बंद के कारण घाटी जिले पूरी तरह से ठप हैं। समूहों ने 25 अप्रैल तक हमलावरों को गिरफ्तार करने की डेडलाइन दी है। अगर मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।
मणिपुर में 2023 से चली आ रही मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के बीच यह ताजा घटना राज्य को फिर से अस्थिरता की ओर ले जा रही है। पहले के मुकाबले कुछ महीनों की शांति के बाद यह हमला राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लिए नई चुनौती बन गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री ने शांति की अपील की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सुरक्षा बल हमलावरों की पहचान करने में नाकाम रहे हैं। फिलहाल इंटरनेट सेवाएं कई जिलों में निलंबित हैं और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
मणिपुर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में से एक है, जहाँ मैतेई (घाटी क्षेत्र में बहुसंख्यक), कुकी-जो (पहाड़ी इलाकों में) और नागा समुदायों के बीच लंबे समय से जातीय तनाव रहा है। राज्य की कुल आबादी में मैतेई लगभग 53% हैं, जबकि आदिवासी (कुकी और नागा) करीब 40%। इम्फाल घाटी (कुल क्षेत्रफल का मात्र 10%) मुख्य रूप से मैतेई बहुल है, जबकि 90% पहाड़ी क्षेत्र कुकी-जो और नागा समुदायों के अधीन हैं।
मणिपुर कभी एक स्वतंत्र राजतंत्र (कांगलीपाक) था, जहाँ मैतेई राजाओं का शासन था। पहाड़ी जनजातियाँ (नागा और कुकी) अक्सर घाटी पर हमले मारती थीं। ब्रिटिश काल में ब्रिटिश ने "हिल्स" और "वैली" को अलग-अलग कानूनों से शासित किया, जिसने समुदायों के बीच विभाजन को और गहरा किया। 1949 में मणिपुर का भारत संघ में विलय हुआ, जिसका मैतेई समुदाय में काफी विरोध हुआ और इससे अलगाववादी आंदोलन शुरू हुए।
स्वतंत्रता के बाद मणिपुर में भूमि कानून (Manipur Land Revenue and Reforms Act, 1960) ने घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों को अलग रखा। मैतेई समुदाय को पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीदने या बसने की अनुमति नहीं है, जबकि आदिवासी समुदाय घाटी में आ सकते हैं। यह असमानता आज भी मुख्य मुद्दा है।

पुरानी हिंसक घटनाएँ

  • 1990 का दशक: नागा-कुकी संघर्ष में सैकड़ों कुकी मारे गए और हजारों विस्थापित हुए।
  • 1993: मैतेई और पांगल (मुस्लिम मणिपुरी) के बीच हिंसा।
  • 1997: चुराचांदपुर में कुकी-मैतेई झड़पें।
इन घटनाओं में भूमि, संसाधन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और धार्मिक अंतर (मैतेई मुख्यतः हिंदू, कुकी मुख्यतः ईसाई) प्रमुख कारण रहे।

2023 से चल रही हिंसा के मुख्य कारण

2023 की हिंसा की जड़ 2012 से चली आ रही मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा की मांग में है। मेइती समुदाय (OBC श्रेणी में) ST दर्जा चाहता था ताकि उन्हें आरक्षण, सरकारी नौकरियों और शिक्षा में लाभ मिले।27 मार्च 2023: मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई को ST सूची में शामिल करने की सिफारिश करने का निर्देश दिया।
3 मई 2023: ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने पहाड़ी जिलों में "ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च" निकाला। इस मार्च के बाद इम्फाल घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों में हिंसा भड़क उठी।
  • कुकी-जो समुदाय ने डर जताया कि ST दर्जा मिलने पर मैतई पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खरीद सकेंगे, उनकी राजनीतिक शक्ति बढ़ेगी और आदिवासियों की जमीन, नौकरियाँ तथा संसाधन प्रभावित होंगे।