मणिपुर में रविवार को हिंसा और बढ़ गई और मृतकों की संख्या 9 हो गई। नई हत्याओं का सिलसिला तब शुरू हुआ जब शुक्रवार रात नागा-बहुल कामजोंग ज़िले के कुकी-बहुल चसाड गाँव में पाँच बच्चों की माँ की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
मणिपुर में हिंसा फिर से शुरू। एन. बीरेन सिंह द्वारा साझा किए गए वीडियो का ग्रैब
मणिपुर के पहाड़ी जिलों में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। शुक्रवार से कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में हुई अलग-अलग घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। ताज़ा हत्याओं के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है। राज्य सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे हैं। फरवरी से कुकी और नागा समुदायों के बीच जारी हिंसा में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने निर्दोष नागरिकों की हत्या और हिंसा की निंदा की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति, बातचीत तथा आपसी सद्भाव को प्राथमिकता देने की अपील की है।
एक महिला की हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा
हिंसा की ताज़ा घटनाओं का सिलसिला शुक्रवार रात कामजोंग जिले के चसाड गांव से शुरू हुआ। नागा-बहुल कामजोंग जिले के कुकी-बहुल इस गांव में अज्ञात हमलावरों ने 22 वर्षीय एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। महिला पांच बच्चों की मां थी। इस हत्या के बाद कुकी और नागा सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। यह गोलीबारी शनिवार सुबह तक जारी रही। इस दौरान 42 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई और 10 घरों में आग लगा दी गई।
स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए गांव में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 162 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई। इस आदेश का उद्देश्य लोगों की आवाजाही और गतिविधियों पर जरूरी प्रतिबंध लगाकर आगे की हिंसा को रोकना है। महिला की हत्या के पीछे किसका हाथ था, इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
कांगपोकपी में तीन की हत्या
कामजोंग की घटना के बाद शनिवार को कांगपोकपी जिले के तापन और मकुई गांवों में संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में तीन लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में दो नागा ग्राम रक्षक एम. दैमाई और आर. गंगमेई शामिल थे। तीसरे मृतक की पहचान रिंगकांगमई के रूप में हुई है।इस घटना को लेकर नागा नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी JTC मणिपुर ने एक और गंभीर दावा किया है। संगठन के मुताबिक, 52 वर्षीय ग्रामीण अजिनबोउ आर. का उग्रवादियों ने सिर काट दिया।
संगठन ने उनका कटा हुआ सिर लौटाने की मांग की, ताकि मृतक का अंतिम संस्कार सम्मानजनक तरीके से किया जा सके। यह दावा संगठन की ओर से किया गया है। कांगपोकपी जिले के मकुई आशांग और तापन इलाकों में सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी की भी खबर है। इन घटनाओं के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
भारत-म्यांमार सीमा के पास दो की मौत
कामजोंग जिले के निंगचौ गांव में भी शनिवार को संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला किया। यह गांव भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित तांगखुल नागा बस्ती है। अधिकारियों के अनुसार, हमलावर गांव में घुसे और गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय नगाचांसो निंगशेन और 48 वर्षीय लेइशिशान लेइशादांग के रूप में हुई है।
घटना की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बल गांव पहुंचे। स्थानीय लोगों का दावा है कि गोलीबारी करने के बाद हमलावर म्यांमार की ओर भाग गए। हालांकि, हमलावरों की पहचान और उनके सीमा पार जाने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। सीमा के नजदीक हुई इस घटना के बाद सुरक्षा बलों के सामने चुनौती बढ़ गई है। इलाके में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमलावरों का पता लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
उखरुल में कार पर गोलीबारी, चालक की मौत
मणिपुर के उखरुल जिले में भी शनिवार को हिंसा की एक घटना हुई। चेपू याओलेन गांव के पास संदिग्ध उग्रवादियों ने एक कार पर गोलीबारी की। कार चला रहे 40 वर्षीय संदीप राय की गोली लगने से मौत हो गई। बताया गया कि उनकी मौत वाहन के भीतर ही हो गई। इस घटना ने हिंसा के दायरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कामजोंग और कांगपोकपी के अलावा उखरुल में भी हत्या की घटना सामने आने से कई इलाकों में तनाव बना हुआ है।
हिंसा वाले इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल
लगातार हो रही हत्याओं और गोलीबारी के बाद प्रशासन ने सबसे ज्यादा प्रभावित कामजोंग और कांगपोकपी जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बलों को हालात नियंत्रित करने और आगे की हिंसा रोकने के लिए तैनात किया गया है।
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या और हिंसा की वह निंदा करते हैं। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल प्रभावी कदम उठाकर शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने तथा सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी समुदायों से अपील की कि वे संयम बरतें और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने में सहयोग करें। उन्होंने शांति, संवाद और सद्भाव को प्राथमिकता देने की बात कही। हालांकि, ताजा घटनाओं के बाद प्रभावित गांवों में लोगों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। लगातार हो रही गोलीबारी और घरों में आगजनी से आम लोगों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है। एन. बीरेन सिंह ने राज्य में हिंसा को लेकर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
फरवरी से हिंसा में 40 से अधिक मौतें
मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच हिंसा का यह नया दौर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस साल फरवरी से जारी हिंसा में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस दौरान दर्जनों घरों को भी आग के हवाले किया गया है। राज्य में इससे पहले मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भी बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा हुई थी। इस संघर्ष में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि 49 लोग अब भी लापता बताए गए थे। हिंसा के कारण हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।
इस तरह मणिपुर में अलग-अलग समुदायों के बीच जारी संघर्ष ने राज्य की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। ताजा घटनाएं इस चिंता को और बढ़ाती हैं कि पहाड़ी जिलों में तनाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो हिंसा और फैल सकती है।