मणिपुर में हिंसा के ख़िलाफ़ लोगों के प्रदर्शन के बीच सरकार ने यूएपीए पर एक ऐसा फ़ैसला ले लिया है जिसका कड़ा विरोध हो रहा है। मणिपुर सरकार ने यूएपीए क़ानून के तहत निचले रैंक के पुलिस अधिकारियों को भी गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती की शक्तियां दे दी हैं। इस फ़ैसले का एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने जोरदार विरोध किया है और सरकार से इस अधिसूचना को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
दरअसल, मणिपुर गृह विभाग ने 22 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी की। इसमें गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 43A को लागू करने के लिए गृह विभाग के प्रशासनिक सचिव को डेजिगनेटेड अथॉरिटी बनाया गया है। लेकिन नयी अधिसूचना में गिरफ्तारी के अधिकार को बढ़ाया गया है। अब पूरे राज्य में सिविल पुलिस और आर्म्ड पुलिस दोनों में हेड कांस्टेबल या हवलदार रैंक से ऊपर के सभी पुलिस अधिकारी को UAPA के तहत गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती करने का अधिकार मिल गया है। पहले ये शक्तियां केवल उच्च रैंक के अधिकारियों तक सीमित थीं। इस फैसले से बहुत ज्यादा पुलिसकर्मियों को ये कड़ी ताकत मिल गई है।
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युवा फोरम का विरोध

इम्फाल घाटी स्थित ‘यूथ्स फोरम फॉर प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स’ यानी YFPHR ने एक बयान जारी कर इस अधिसूचना को चौंकाने वाला बताया है। संगठन ने सरकार से तुरंत इस नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की है।
YFPHR का कहना है कि इतने सारे जूनियर पुलिस अधिकारियों को UAPA जैसे सख्त कानून की इतनी बड़ी शक्तियां देने से इसका दुरुपयोग हो सकता है। इससे आम लोगों में डर का माहौल बन सकता है, खासकर मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में जहां पहले से ही सुरक्षा की चुनौतियाँ बनी हुई हैं और जातीय तनाव है।

युवा संगठन ने कहा कि इस अधिसूचना से मनोवैज्ञानिक भय फैल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल शांतिपूर्वक न्याय की मांग करने वाले निहत्थे नागरिकों को अपराधी बनाने और उनके खिलाफ अत्याचार करने के लिए कर सकती है।

हाल की घटनाओं का ज़िक्र

YFPHR ने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में बिष्णुपुर जिले में बम विस्फोट में दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के विरोध में जब लोग प्रदर्शन कर रहे थे तो केंद्रीय सुरक्षा बलों के कैंप पर हुए हमले में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई।

संगठन का कहना है कि इन पांच मौतों के दोषियों की गिरफ्तारी और सजा की मांग लोग लगातार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में UAPA की शक्तियाँ निचले अधिकारियों को सौंपना गलत समय पर लिया गया फ़ैसला है।
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संगठन की मुख्य मांगें

  • यूएपीए की इस अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए।
  • बच्चों और तीन नागरिकों की हत्या के दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।
  • राज्य में सैन्यीकरण और आम लोगों के खिलाफ अत्याचार बंद किया जाए।
  • सरकार अपने नागरिकों की जान और संपत्ति की रक्षा करने का मूल कर्तव्य न भूले।

इंफाल घाटी बंद

इस अधिसूचना के ख़िलाफ़ इंफाल घाटी में बंद का आह्वान किया गया और इसका असर रहा। विभिन्न संगठनों ने पांच दिन का बंद बुलाया है। बिष्णुपुर में महिलाओं द्वारा निकाले गए मार्च रैली के दौरान सुरक्षा बलों को रास्तों की सुरक्षा करते देखा गया।
अभी तक मणिपुर सरकार ने YFPHR की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मुद्दा मणिपुर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और मानवाधिकारों को लेकर चर्चा को और तेज कर सकता है।