एआईएडीएमके में तब राजनीतिक संकट और गहरा गया जब पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी यानी ईपीएस ने बागी नेताओं को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया। इनमें सी.वी. शणमुगम और एस.पी. वेलुमणि जैसे बड़े नेता शामिल हैं। यह कार्रवाई तब हुई जब विधानसभा में विश्वास मत के दौरान एआईएडीएमके के कुछ विधायकों ने विजय की सरकार के पक्ष में वोट दे दिया।

वोटिंग के बाद ही AIADMK में यह संकट आया है और ईपीएस ने कुल 29 नेताओं को पार्टी के अलग-अलग पदों से हटा दिया है। निकाले गए लोगों में 13 मौजूदा विधायक भी शामिल हैं। नेताओं में ज़िला सचिव के पद भी शामिल हैं। शनमुगम और वेलुमणि के अलावा जिन वरिष्ठ नेताओं को भी उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है उनमें आर. कामराज, सी. विजयभास्कर, थंगामणि, के.पी. अनबझगन, के.सी. वीरमणि और एम.आर. विजयभास्कर शामिल हैं।
ताज़ा ख़बरें
एआईएडीएमके में यह संकट टीवीके प्रमुख विजय को फ्लोर टेस्ट में समर्थन देने को लेकर आया। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और विजय की पार्टी तमिलग वेट्री कझगम यानी टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। ये बहुमत के लिए काफ़ी नहीं थीं। लेकिन कांग्रेस, वामपंथी पार्टियाँ, आईयूएमएल और एआईएडीएमके के कुछ बागी विधायकों के समर्थन से टीवीके सरकार ने विश्वास मत आसानी से पास कर लिया। सरकार को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला। इससे साफ़ हो गया कि एआईएडीएमके के कुछ विधायक ईपीएस के फ़ैसले के ख़िलाफ़ चले गए। रिपोर्टें हैं कि एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने विजय के समर्थन में वोट किया।

शणमुगम ने खोला मोर्चा

विश्वास मत के तुरंत बाद वरिष्ठ नेता सी.वी. शणमुगम ने ईपीएस के ख़िलाफ़ खुलकर बगावत कर दी। उन्होंने कहा कि ईपीएस ने पार्टी की मूल विचारधारा को छोड़ दिया है। शणमुगम ने कहा, 'चुनाव से पहले भी पार्टी में मांग थी कि जो लोग छोड़कर गए या निकाले गए थे, उन्हें वापस पार्टी में ले लिया जाए ताकि पार्टी मज़बूत हो और चुनाव जीत सके। लेकिन ईपीएस को इसकी कोई चिंता नहीं है।'

उन्होंने आगे कहा,
मैंने गद्दारी नहीं की। हमारी पार्टी का बुनियादी सिद्धांत डीएमके को ख़त्म करना है। पिछले 50 साल से हम डीएमके के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं। लेकिन चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बनने के चक्कर में ईपीएस ने एआईएडीएमके के मूल सिद्धांतों को भुला दिया।
सी.वी. शणमुगम, AIADMK के बाग़ी नेता

ईपीएस का संदेश

ईपीएस ने शणमुगम और वेलुमणि समेत अन्य नेताओं को तुरंत पार्टी के सभी पदों से हटा दिया। पार्टी के अंदर यह साफ़ संदेश है कि जो ईपीएस की लाइन के खिलाफ जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
तमिलनाडु से और ख़बरें

एआईएडीएमके में पुरानी क़लह?

एआईएडीएमके पिछले कुछ समय से अंदरूनी कलह से जूझ रही है। चुनाव में हार के बाद पार्टी में एक गुट ईपीएस के फ़ैसलों से नाखुश था। वे चाहते थे कि पुराने नेताओं को वापस लाया जाए और डीएमके विरोधी रणनीति को और मज़बूत किया जाए। लेकिन ईपीएस का रुख अलग रहा, जिसके कारण यह बग़ावत सामने आई।

अभी यह साफ़ नहीं है कि निकाले गए नेताओं और उनके समर्थक विधायकों का अगला क़दम क्या होगा। क्या वे अलग पार्टी बनाएंगे या किसी अन्य दल से हाथ मिलाएंगे? राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर काफी चर्चा है। यह घटना तमिलनाडु की राजनीति को और रोचक बना रही है। विजय की सरकार अब थोड़ी मज़बूत नज़र आ रही है, जबकि एआईएडीएमके में फूट साफ़ दिखाई दे रही है। पार्टी दो फाड़ भी हो सकती है।