तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा से इस्तीफा देने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन "अन्नामलाई मक्कल इयक्कम" (AMI) की शुरुआत की है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि इस पहल को जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है और अब तक 3,000 से अधिक लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया है। पीएम मोदी और बीजेपी के महासचिव बी एल संतोष के जबरदस्त प्रशंसक अन्नामलाई का कहना है कि उनका संगठन तमिलनाडु में व्यक्तिपूजा के खिलाफ आम आदमी की राजनीति के मकसद से आया है।  
अन्नामलाई ने कहा कि "हमें एक व्यक्ति आधारित राजनीति से बाहर निकलना होगा। हमें आम आदमी की राजनीति चाहिए।" उनका दावा है कि तमिलनाडु की राजनीति दशकों से कुछ बड़े नेताओं और परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जबकि आम नागरिक की भागीदारी सीमित रही है। AMI इसी राजनीतिक संस्कृति को बदलने का प्रयास करेगा।

क्या अन्नामलाई नई पार्टी बनाएंगे?

अपने समर्थकों के साथ बातचीत में अन्नामलाई ने स्पष्ट संकेत दिया कि उनका आंदोलन भविष्य में एक राजनीतिक दल का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि: उनका संगठन आने वाले चुनावों में हिस्सा लेगा। तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक दिशा देने का प्रयास करेगा। राज्य में वैकल्पिक नेतृत्व मॉडल विकसित करेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने घोषणा की "मैं अगला लोकसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ूंगा।"
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अन्नामलाई की राजनीति क्या है

अन्नामलाई की राजनीति को मोटे तौर पर पांच प्वाइंट्स में समझा जा सकता है:
भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति
आईपीएस अधिकारी रहते हुए उनकी छवि ईमानदार और सख्त अधिकारी की रही। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया।
गैर-वंशवादी नेतृत्व
वे अक्सर द्रविड़ राजनीति पर परिवारवाद का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि नेतृत्व योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि पारिवारिक विरासत के आधार पर।
राष्ट्रवादी विमर्श
अन्नामलाई भाजपा की राष्ट्रवादी राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं और राष्ट्रीय मुद्दों को तमिलनाडु की राजनीति से जोड़ने का प्रयास करते रहे हैं।
युवा और पेशेवर राजनीति
वे शिक्षित युवाओं, पेशेवरों, स्टार्टअप उद्यमियों और मध्यम वर्ग को राजनीति में लाने की बात करते हैं।
'कॉमन मैन पॉलिटिक्स'
AMI की मूल अवधारणा यही है कि राजनीति नेताओं के बजाय नागरिकों के इर्द-गिर्द घूमे।

तमिलनाडु की राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है?

अन्नामलाई पिछले कुछ वर्षों में तमिलनाडु भाजपा का सबसे लोकप्रिय चेहरा बनकर उभरे थे। यदि उनके साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जाते हैं तो भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को झटका लग सकता है। विशेषकर शहरी युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष का कहना है कि बीजेपी पर अन्नामलाई के जाने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है।

विपक्षी वोटों का बंटवारा या बीजेपी की मददः अगर AMI स्वतंत्र राजनीतिक दल बनता है तो यह भाजपा की मदद चुनाव में कर सकता है। अभी तक तमिलनाडु में द्रविड़ और गैर द्रविड़ राजनीति होती रही है। बीच-बीच में फिल्मी एक्टर भी आ जाते हैं लेकिन कुल मिलाकर सारी राजनीति व्यक्ति पूजा के आसपास होती है। अन्नामलाई कह रहे हैं कि वो कल्ट यानी व्यक्तिपूजा की राजनीति को खत्म कर देंगे। उन्होंने आम आदमी की बात भी कही है। अन्नामलाई की बातें एआईएडीएमके के कुछ समर्थकों को आकर्षित कर सकती हैं। और कुछ हद तक गैर-द्रविड़ मतदाताओं को भी प्रभावित कर सकती है। लेकिन इससे तमिलनाडु में विपक्षी वोटों का और अधिक विखंडन हो सकता है।

अन्नामलाई का आदर्श अभी भी बीजेपी और उसके नेता हैं। बीजेपी ने कभी आम आदमी की राजनीति नहीं की है। उसकी राजनीति धर्म आधारित रहती है। विपक्ष तो उस पर साम्प्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाता है। सपा और वामपंथी दल बीजेपी पर ब्राह्मणवाद की राजनीति का भी आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में अन्नामलाई कैसे तालमेल बैठाएंगे, यह जल्द ही साफ हो जाएगा। अभी तक उन्होंने बीजेपी के साम्प्रदायिक राजनीति की आलोचना नहीं की है।

DMK के लिए तत्काल खतरा नहीं

प्रमुख विपक्षी दल Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) के लिए फिलहाल कोई बड़ा चुनावी खतरा अन्नामलाई के संगठन से दिखाई नहीं देता। इसकी सबसे बड़ी वजह AMI अभी संगठनात्मक रूप से शुरुआती अवस्था में है। इसके पास मजबूत जिला स्तर का ढांचा नहीं है। तमिलनाडु में द्रविड़ दलों का दशकों पुराना नेटवर्क मौजूद है।अन्नामलाई की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और सोशल मीडिया उपस्थिति है। यदि वे इस समर्थन को जमीनी संगठन में बदलने में सफल होते हैं तो वे 2029 या उसके बाद के चुनावों में एक महत्वपूर्ण ताकत बन सकते हैं।

तीसरे विकल्प की कितनी संभावनाः तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से मुख्यतः DMK और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के बीच केंद्रित रही है। अन्नामलाई का प्रयास इस द्विध्रुवीय राजनीति के बीच तीसरा विकल्प बनाने का हो सकता है। हालांकि भारत के कई राज्यों में तीसरे विकल्प बनाने के प्रयास पहले भी हुए हैं और अधिकांश को संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वैसे भी एक्टर विजय की पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु की राजनीति को पहले ही बदल दिया है।

क्या बीजेपी ने तमिलनाडु में अपनी रणनीति बदली है

अन्नामलाई का भाजपा छोड़ना तमिलनाडु की राजनीति की हालिया सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा सकता है। भाजपा ने राज्य में अपनी पहचान मजबूत करने के लिए काफी हद तक अन्नामलाई के नेतृत्व पर भरोसा किया था। लेकिन अन्नामलाई बीजेपी के लिए कोई करिश्मा नहीं कर पाए। तमिलनाडु में बीजेपी की मौजूदगी का एहसास कहीं नहीं होता। कहा जा रहा है कि बीजेपी अब अपने दम पर नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीति को काटने के लिए अन्नामलाई के क्षेत्रीय दल की आड़ में काम करेगी। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे बीजेपी का गेमप्लान बताया है। हालांकि इसके कोई सबूत नहीं हैं।
यह मान लेना अभी जल्दबाजी होगी कि AMI तुरंत कोई बड़ी राजनीतिक ताकत बन जाएगा। तमिलनाडु की राजनीति अत्यंत संगठित, वैचारिक और क्षेत्रीय पहचान पर आधारित है। ऐसे माहौल में नई राजनीतिक शक्ति को खड़ा करने के लिए केवल लोकप्रियता नहीं बल्कि मजबूत कैडर, वित्तीय संसाधन, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी मशीनरी की आवश्यकता होती है।
फिर भी अन्नामलाई की व्यक्तिगत छवि, प्रशासनिक पृष्ठभूमि, युवाओं में लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली उन्हें राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाए रख सकती है। लेकिन जिस तरह से वे बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं के प्रशंसक हैं, इस बात पर तमिलनाडु में लोग काफी सजग रहता है। अगर वे अपने आंदोलन को मजबूत संगठन में बदलने में सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में तमिलनाडु की राजनीति में एक नए ध्रुव का उदय देखने को मिल सकता है। फिलहाल AMI को तत्काल चुनावी चुनौती की बजाय "दीर्घकालिक राजनीतिक परियोजना" के रूप में देखना अधिक उचित होगा। इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन उसके संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और चुनाव में प्रदर्शन के बाद ही किया जा सकेगा।