तमिलनाडु में एआईएडीएमके के महासचिव के. पलानीस्वामी यानी ईपीएस को बागी विधायकों के मामले में एक और बड़ा झटका लगा है। तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने मंगलवार को 21 बागी एआईएडीएमके विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाली याचिका खारिज कर दी। ये 21 विधायक मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके के पक्ष में वोट देने वाले बागी गुट के सदस्य हैं। स्पीकर के इस फ़ैसले से बागी विधायकों को तुरंत राहत मिल गई है।

ये 21 विधायक उन 25 विधायकों में शामिल थे जिन्होंने विश्वास प्रस्ताव के दौरान टीवीके सरकार के पक्ष में वोट दिया था। बाक़ी चार विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है और टीवीके में शामिल हो गए हैं।
एआईएडीएमके के इन विधायकों की मुसीबत तब बढ़ी जब 13 मई को विधानसभा में विश्वास मत हुआ। उस वक्त कम से कम 25 एआईएडीएमके विधायकों ने शणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ मिलकर मुख्यमंत्री विजय के पक्ष में वोट दिया। इसकी वजह से टीवीके के वोटों की संख्या 119 से बढ़कर 144 हो गई और विजय सरकार को आसानी से बहुमत मिल गया।

दूसरी तरफ, ईपीएस के वफादार 22 विधायकों ने विजय के ख़िलाफ़ वोट दिया। इससे पार्टी में खुला विभाजन साफ़ दिख गया। बाद में ख़बर आई थी कि 5 विधायक वापस ईपीएस के खेमे में लौट आए थे।

क्यों नहीं हुआ पार्टी का विभाजन?

एंटी-डिफेक्शन कानून के मुताबिक, पार्टी का औपचारिक विलय करने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 31 विधायकों की ज़रूरत होती है। बागी गुट के पास इतनी संख्या नहीं थी, इसलिए वे टीवीके में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हो सके। 

हालांकि एआईएडीएमके का पूरा बागी गुट तो टीवीके में शामिल नहीं हो पाया, लेकिन कुछ दिन पहले इनमें से 4 विधायकों ने औपचारिक रूप से टीवीके जॉइन कर लिया है।

दोनों पक्षों ने दी थी याचिका

पार्टी के दोनों गुटों ने स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के पास एक-दूसरे के ख़िलाफ़ अयोग्यता की याचिका दाखिल की थी। स्पीकर ने बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

बागी नेताओं का बयान

बागी गुट के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि ने कहा कि वे पार्टी को तोड़ना नहीं चाहते। उन्होंने कहा, 'हम न तो पार्टी विभाजित करना चाहते हैं और न ही विजय सरकार में कोई पद लेना चाहते थे।' उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अभी भी एआईएडीएमके महासचिव के. पलानीस्वामी के प्रति वफादार हैं और पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की ‘अम्मा राज’ की विरासत को फिर से जीवित करने पर ध्यान देना चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि हाल ही में हुई मंत्रिमंडल विस्तार में बागी एआईएडीएमके विधायकों को कोई मंत्री पद नहीं दिया गया।

स्पीकर के इस फ़ैसले से ईपीएस की पकड़ और कमजोर हो गई है। बागी विधायकों के लगातार समर्थन और सार्वजनिक तौर पर सत्ताधारी दल को मिल रहे समर्थन से एआईएडीएमके में अनिश्चितता बढ़ गई है। हालाँकि बागी नेता लगातार कह रहे हैं कि वे पार्टी के साथ हैं, लेकिन स्थिति काफी जटिल बनी हुई है।