तमिलनाडु में सत्तारूढ़ TVK के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्षी DMK ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक के साथ हुई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर दिया। दोनों पक्षों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। TVK नेता और मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने दावा किया कि अगर SIR नहीं हुआ होता तो उनकी पार्टी विधानसभा की 234 में से 160 से ज्यादा सीटें जीत सकती थी। वहीं, DMK के कानूनी प्रकोष्ठ के सचिव आई. परंथमन ने सवाल उठाया कि तमिलनाडु में 74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने क्या क़दम उठाए हैं।
राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SSR को लेकर शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद ही सत्तारूढ़ TVK के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्षी DMK के प्रतिनिधि बैठक से बाहर निकल गए। दोनों पक्षों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और चुनाव आयोग को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
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देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और क़ानूनी बहस चल रही है। दिल्ली में भी इस प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग उठी है।

SIR नहीं होता तो 160 से ज्यादा सीटें जीतते: TVK

तमिलनाडु के मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने बैठक से बाहर आने के बाद कहा कि टीवीके शुरू से ही SIR का विरोध करती रही है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में गलतियां हुई हैं और चुनाव आयोग को इनकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। निर्मल कुमार ने दावा किया कि अगर SIR नहीं हुआ होता तो टीवीके अप्रैल 23 को हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की 234 सीटों में से 160 से अधिक सीटें जीत सकती थी।

निर्मल कुमार ने कहा कि पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग इसलिए की है, क्योंकि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव पूरी निष्पक्षता से कराए जाएँ। टीवीके का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और आयोग को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए।

DMK ने पूछा- 74 लाख नाम हटे, आयोग ने क्या किया?

विपक्षी डीएमके ने भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के सचिव आई. परंथमन ने कहा कि तमिलनाडु में 74 लाख से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद आयोग ने क्या क़दम उठाए हैं, यह साफ़ होना चाहिए। परंथमन के मुताबिक़ डीएमके ने बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक के सामने अपनी आपत्तियाँ रखीं। इसके बाद पार्टी के प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
डीएमके का सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में क्या पर्याप्त जाँच की गई और प्रभावित मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए आयोग ने क्या व्यवस्था की है।

SIR और SSR में क्या अंतर है?

इस विवाद में SIR और SSR के बीच अंतर समझना जरूरी है। दोनों का संबंध मतदाता सूची की जांच और सुधार से है, लेकिन इनकी प्रक्रिया अलग है। SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में मतदाता सूची की बड़े पैमाने स्तर पर जांच की जाती है। इसमें सूची को नए सिरे से तैयार करने और मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन करने पर जोर रहता है। इसी प्रक्रिया को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आई हैं।
SSR यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया में मौजूदा मतदाता सूची में सुधार और संशोधन किए जाते हैं। इसका उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलतियों को ठीक करना और नियमों के अनुसार जरूरी बदलाव करना है। यह नियमित पुनरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है।
चुनाव आयोग ने हाल ही में 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SSR कराने का निर्देश दिया है। इसके लिए 1 जनवरी को पात्रता की तारीख तय किया गया है। इस तरह SSR और SIR एक ही प्रक्रिया नहीं हैं। SSR में मौजूदा सूची में संशोधन किया जाता है, जबकि SIR में मतदाता सूची की अधिक व्यापक और नए सिरे से जांच की जाती है। तमिलनाडु में शुक्रवार की बैठक SSR को लेकर थी, लेकिन राजनीतिक दलों की आपत्तियाँ SIR विवाद और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मुद्दे से भी जुड़ी हैं।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों तेज हुई?

टीवीके और डीएमके की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर जवाबदेही स्वीकार करें। दोनों पक्षों का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गलतियों और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मामले में चुनाव आयोग को साफ़ जवाब देना चाहिए। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है।
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दिल्ली में भी हाल के दिनों में SIR के विरोध में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने कथित गड़बड़ियों की जाँच और SIR को रद्द करने की मांग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग उठाई थी। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियाँ लगाई गईं, इंटरनेट बंद किया गया, निषेधाज्ञा लागू की गई और बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया।

निष्पक्षता और पारदर्शिता का सवाल

तमिलनाडु की बैठक से टीवीके गठबंधन और डीएमके के बाहर निकलने से मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। टीवीके का दावा है कि पुनरीक्षण नहीं होता तो उसे विधानसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिल सकती थीं। दूसरी ओर, डीएमके ने 74 लाख से अधिक नाम हटाए जाने के बाद चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाया है।

अब विवाद के केंद्र में तीन प्रमुख सवाल हैं-

  • मतदाता सूची में कितने नाम और किन कारणों से हटाए गए?
  • क्या प्रभावित मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी सुधार कराने का पर्याप्त अवसर मिला?
  • और चुनाव आयोग इन आपत्तियों का समाधान किस तरह करेगा?
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का आधार होती है। इसलिए उसमें नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है। तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार और सीईसी के इस्तीफे की मांग इसी प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक अविश्वास को दिखाती है।