कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। मीनाक्षी के ख़िलाफ़ निजी शिकायत को हैदराबाद की नांपल्ली अदालत ने यह कहते हुए लौटा दिया कि यह उसके क्षेत्राधिकार में नहीं है। मीनाक्षी ने इस शिकायत का ज़िक्र हलफनामे में नहीं किया था जिससे विवाद हुआ।
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को जिस शिकायत की वजह से रद्द किया गया उस शिकायत को ही हैदराबाद की एक अदालत ने लौटा दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है। यानी वह ऐसी शिकायत है जो उस कोर्ट के लायक भी नहीं है। इसी शिकायत का मीनाक्षी नटराजन के हलफनामे में ज़िक्र नहीं होने का हवाला देते हुए रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन रद्द कर दिया। चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पर पुनर्विचार नहीं किया।
नांपल्ली कोर्ट के IV अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने शुक्रवार को यह शिकायत लौटा दी। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि शिकायत में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें पूर्व या वर्तमान जनप्रतिनिधि शामिल हैं, इसलिए यह मामला इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। शिकायत में कुल 7 लोगों के नाम थे, जिनमें मीनाक्षी नटराजन भी शामिल थीं।
मीनाक्षी नटराजन का नाम कैसे आया?
एक 47 वर्षीय महिला ने कुंभम शिव कुमार रेड्डी नाम के एक शख्स पर यौन उत्पीड़न और धमकी देने का आरोप लगाया था। एक शिकायत के आधार पर हैदराबाद के पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन ने मामला दर्ज किया। बाद में कथित पीड़ित ने कथित तौर पर मीनाक्षी नटराजन और अन्य कांग्रेस नेताओं से संपर्क किया और उनसे आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए कहा। लेकिन, बताया जाता है कि शिव कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मीनाक्षी नटराजन पर आरोप था कि वे तेलंगाना कांग्रेस की AICC प्रभारी के रूप में इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही हैं। इसके बाद पीड़ित ने नांपल्ली कोर्ट का रुख किया और मीनाक्षी नटराजन समेत सात लोगों के खिलाफ़ निजी शिकायत दर्ज कराई और कोर्ट से उन्हें कानून के मुताबिक सज़ा देने की मांग की।तेलंगाना की इसी शिकायत के आधार पर मध्य प्रदेश के रिटर्निंग अधिकारी ने 9 जून को मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी ने अपने हलफनामे में इस शिकायत का जिक्र नहीं किया।
कांग्रेस ने इस पर आपत्ति की और कहा कि जब तक एफ़आईआर दर्ज न हो और उस मामले में कम से कम दो साल सजा होने का प्रावधान न हो तो उसका हलफनामे में ज़िक्र करना ज़रूरी नहीं होता है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस के तर्कों को नहीं माना। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा उम्मीदवारी रद्द होने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए हम इसमें सीधे दखल नहीं दे सकते। लेकिन कोर्ट ने उन्हें चुनाव याचिका दायर करने की पूरी छूट दी है।मीनाक्षी नटराजन ने क्या दलीलें दीं?
कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट की धारा 33ए के अनुसार, सिर्फ उन आपराधिक मामलों का खुलासा करना ज़रूरी है जिनमें चार्जशीट फ्रेम हो चुकी हो। सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन के ख़िलाफ़ तेलंगाना में शिकायत अभी शुरुआती चरण में है और कोर्ट ने अभी इसका संज्ञान भी नहीं लिया है। सिर्फ नोटिस मिला है। लेकिन नामांकन तक रद्द कर दिया गया।
सिंघवी ने यह भी दलील दी कि यह शिकायत किसी और व्यक्ति पर 2022 में छेड़छाड़ की थी। मीनाक्षी नटराजन को 2025 में तेलंगाना कांग्रेस प्रभारी बनने के बाद उसमें चौथे आरोपी के रूप में जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यह बेतुका है। सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी का फैसला 'बेतुका और मनमाना था। इससे चुनाव में बराबरी का मौका खत्म हो गया।विरोधी पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है, यह सिर्फ कानूनी अधिकार है। इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका नहीं चल सकती। अनुच्छेद 329 चुनाव प्रक्रिया में कोर्ट के दखल पर रोक लगाता है। उन्होंने दलील दी कि ग़लत नामांकन रद्द होने पर सिर्फ़ चुनाव याचिका ही सही रास्ता है।
अब मीनाक्षी नटराजन का क्या होगा?
कोर्ट द्वारा शिकायत वापस किए जाने के बाद अब देखना होगा कि महिला इस मामले को कहां ले जाती है। मीनाक्षी नटराजन की तरफ से अब चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है। इस घटनाक्रम से राज्यसभा नामांकन रद्द होने के फैसले पर नए सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा मामला अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।