तेलंगाना के एक स्कूल के प्रिंसिपल आमिर खान ने दावा किया है कि मैनेजमेंट के कहने पर दूसरे शिक्षक ने उर्दू पढ़ाई थी। बाद में बीजेपी की अमरूर यूनिट के अध्यक्ष एम बालू ने दावा किया था, 'वे स्कूल में उर्दू के साथ नमाज़ और कलमा भी सिखा रहे थे।'
तेलंगाना के स्कूल में उर्दू पढ़ाने का बीजेपी का विरोध। (फोटो साभार-@revathitweets/वीडियो ग्रैब )
तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल आमिर खान से कथित मारपीट के मामले में पुलिस ने सोमवार को बीजेपी के अमरूर अध्यक्ष मंडुला बालू को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि बालू अपने समर्थकों के साथ स्कूल में घुसे और उर्दू पढ़ाने के मुद्दे पर स्कूल प्रबंधन से बहस करते हुए प्रिंसिपल पर हमला किया। स्कूल का प्रबंधन हिंदू पक्ष के पास है, प्रबंधन के फ़ैसले पर ही दूसरे शिक्षक ने दो दिनों तक उर्दू की वर्णमाला पढ़ाई, लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल मुस्लिम आमिर खान की पिटाई की गई। सोशल मीडिया पर इसको लेकर काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। इस बीच, बीजेपी ने सोमवार को तेलंगाना के स्कूलों में उर्दू पढ़ाए जाने को लेकर अमरूर में बंद बुलाया और रैली निकाली।
दरअसल, यह पूरा मामला ही सोशल मीडिया पर आया। यह मामला पहली बार 27 जून को सामने आया था जब अमरूर मंडल के पेरकिट गांव स्थित भारत चंद्र हाई स्कूल में कुछ लोगों ने कथित तौर पर हंगामा किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। आरोप है कि उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल आमिर खान के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। बताया गया कि यह विवाद स्कूल में कुछ बच्चों को उर्दू पढ़ाए जाने की शिकायत को लेकर हुआ।
पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर में मंडुला बालू को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसी मामले में अब उनकी गिरफ्तारी हुई है।
'मैं अंग्रेजी का शिक्षक हूं, उर्दू नहीं पढ़ाता'
37 वर्षीय आमिर खान ने घटना के बाद कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं और वर्ष 2025 से इस स्कूल के प्रिंसिपल हैं। उन्होंने साफ़ किया कि वह उर्दू के शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने मुस्लिम अभिभावकों की मांग पर उर्दू को दूसरी भाषा के रूप में शुरू करने का फ़ैसला लिया था। स्कूल में करीब 25 प्रतिशत छात्र मुस्लिम समुदाय से हैं। कुछ अभिभावकों की मांग पर सत्र की शुरुआत में केवल दो दिनों तक एक अलग शिक्षक द्वारा उर्दू की वर्णमाला सिखाई गई थी। आमिर खान ने कहा कि जब कुछ हिंदू अभिभावकों ने इसका विरोध किया तो स्कूल प्रबंधन ने तुरंत उर्दू की कक्षाएं बंद कर दी थीं।
स्कूल प्रबंधन ने धार्मिक शिक्षा के आरोपों को किया खारिज
बीजेपी नेता मंडुला बालू का आरोप था कि स्कूल में धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बालू ने कहा, 'स्कूल में केवल उर्दू ही नहीं, बल्कि नमाज और कलिमा भी सिखाया जा रहा था'। हालाँकि, स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल कॉरेस्पोंडेंट मल्लेश की तरफ़ से पुलिस में दी गई शिकायत में कहा गया कि स्कूल में किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि केवल दो दिनों तक बच्चों को उर्दू की वर्णमाला सिखाई गई थी और इसके बाद कक्षाएँ बंद कर दी गई थीं।
बीजेपी नेता ने माना था कि की थी हाथापाई
घटना के बाद मंडुला बालू ने स्वीकार किया था कि उनकी प्रिंसिपल से हाथापाई हुई थी। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें संदेह था कि स्कूल में हिंदू छात्रों को इस्लाम की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया।दोनों पक्षों पर दर्ज हैं मामले
स्कूल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मंडुला बालू और उनके समर्थकों के खिलाफ जबरन स्कूल में घुसने, मारपीट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। वहीं दूसरी ओर, अमरूर के तहसीलदार की शिकायत पर प्रिंसिपल आमिर खान और स्कूल कॉरेस्पोंडेंट मल्लेश के खिलाफ भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 तथा धारा 3(5) के तहत विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मंडुला बालू की गिरफ्तारी के बाद मामले की जाँच तेज कर दी गई है। घटना के दौरान मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
बीजेपी ने अमरूर बंद भी बुलाया
इतना ही नहीं, तेलंगाना के स्कूल में उर्दू पढ़ाने के विरोध में बीजेपी ने अमरूर में बंद बुलाया। अमरूर के इस स्कूल में उर्दू पढ़ाए जाने के बीच ही बीजेपी ने तेलंगाना के कुछ सरकारी स्कूलों में उर्दू पढ़ाने के विरोध में एक विरोध रैली और बंद का आयोजन किया। जबकि स्थिति यह है कि तेलंगाना के 'ऑफिशियल लैंग्वेजेज़ एक्ट' के तहत उर्दू राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि भाषा को सांप्रदायिक राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।यह मामला अब राज्य में शिक्षा, भाषा और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसको मुस्लिम विरोधी नफ़रत फैलाने के तौर पर देख रहे हैं और प्रिंसिपल से मारपीट को ध्रुवीकरण की राजनीति के तौर पर देख रहे हैं। कांग्रेस सरकार वाले तेलंगाना में इस घटना को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।