असम के सीएम माणिक साहा।
त्रिपुरा में 16 फरवरी को मतदान है। त्रिपुरा के पिछले चुनाव में बीजेपी ने सीपीएम को सत्ता से हटाया था लेकिन बीजेपी पिछले पांच साल सत्ता में रहते हुए अपना घर ठीक कर पाई। नतीजा ये निकल रहा है कि इस बार विधानसभा चुनाव 2023 में हालात उसके खिलाफ हैं।
वर्ष 2021 के भिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. उनकी पार्टी ने 30 में से 18 सीटें जीत ली थी. अब भाजपा और विपक्षी गठबंधन से सीटों पर तालमेल की बातचीत फेल होने के बाद उसने अकेले ही मैदान में उतरने का फैसला किया है. उसकी निगाहें राज्य की आदिवासी बहुल 20 सीटों पर है. पार्टी की दलील है कि बांग्लादेश से हिंदू बंगालियों की घुसपैठ बढ़ने की वजह से राज्य के मूल निवासी अल्पसंख्यक हो गए हैं.
दूसरी ओर, सीपीएम के वरिष्ठ नेता पवित्र कर कहते हैं कि टिपरा मोथा और भाजपा की टक्कर में वाम-कांग्रेस गठबंधन को फायदा होने की उम्मीद है. आदिवासी इलाकों में अब भी सीपीएम के पास निष्ठावान कार्यकर्ता व समर्थक हैं.