स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से पहले शंकराचार्य होने का सबूत मांगा गया था, अब योगी आदित्यनाथ से हिंदू होने का सबूत मांगा गया है! तो क्या योगी अब और बुरे फँस गए हैं? ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर योगी जी सच में हिंदुओं के प्रति सहानुभूति रखने वाले हैं, तो वे राज्य से गोमांस यानी बीफ का निर्यात तुरंत रोक दें और गाय को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दें। यह बयान प्रयागराज के माघ मेले में स्नान न होने दिए जाने के विवाद के बाद आया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शुक्रवार को वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मैंने 11 दिनों तक धरना दिया, लेकिन कोई अधिकारी मुझे स्नान कराने नहीं आया। अब बहुत देर हो चुकी है। मैं अगले साल माघ मेले में जाऊंगा और सम्मान से स्नान करूंगा।' इसके साथ ही उन्होंने योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों के अंदर गायों की हत्या रोकने की चुनौती दी।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले, "हमारे प्रमाण-पत्र मांगे गए थे और हमने दिए। अब आपको हिंदू सिंपेथाइजर होने का सबूत देना होगा क्योंकि सनातनी समाज हिंदू होने का सबूत मांग रहा है। हिंदू होना केवल भाषणों या भगवे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी असली कसौटी गो-सेवा और धर्म-रक्षा है। हिंदू होने का पहला क़दम गायों से प्यार है। गाय को 'राष्ट्र माता' घोषित करें और उत्तर प्रदेश से गाय के मांस का निर्यात बंद करें। तब हम मानेंगे कि आप हिंदू सिंपेथाइजर हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास मुख्यमंत्री के विश्वस्तों के माध्यम से किया जा रहा है।

'भैंस के मांस की आड़ में बीफ निर्यात'

अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि सारा निर्यात 'भैंस के मांस' के नाम पर होता है, लेकिन बिना डीएनए परीक्षण के इसकी आड़ में गोवंश काटा जा रहा है। 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राज्य में भैंसों की संख्या और निर्यात की मात्रा में भारी अंतर है। जब तक वधशालाओं और कंटेनरों का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं होता, तब तक इसे सरकार की मौन स्वीकृति ही माना जाएगा।

मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश कहाँ?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा भैंस मांस यानी काराबीफ उत्पादक राज्य है, जहाँ से देश के कुल भैंस के मांस निर्यात का बड़ा हिस्सा आता है। भारत से गोमांस यानी काउ बीफ का निर्यात प्रतिबंधित है। राष्ट्रीय स्तर पर 2024-25 में भारत ने 12,54,775 मीट्रिक टन भैंस के मांस निर्यात किया, जिसका मूल्य क़रीब 34000 करोड़ रुपये था। वियतनाम, मिस्र, मलेशिया, इराक, सऊदी अरब जैसे देशों में ये मांस जाता है।

उत्तर प्रदेश देश के भैंस मांस उत्पादन में भैंस आबादी के आधार पर 30% से अधिक हिस्सेदारी रखता है और कुल मांस उत्पादन में 40% से अधिक। राज्य में भैंस मांस निर्यात मुख्य रूप से अलीगढ़, संभल, हापुड़, बरेली, उन्नाव आदि जिलों से होता है। इसमें बीजेपी से जुड़े लोगों के शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।

पूर्व सांसद जवाहर सरकार ने बीफ़ एक्सपोर्ट में लगे लोगों के बारे में दिसंबर महीने में एक्स पर लिखा था, "मोदी का परिवार कहता है कि भारत के टॉप बीफ़ एक्सपोर्टर सभी मुसलमान हैं। ग्रोक ने इन लोगों को टॉप भारतीय बीफ़ एक्सपोर्टर्स में शामिल किया है-
1) सभरवाल का अल कबीर,
2) सुनील और अजय सूद का अल-नूर एक्सपोर्ट्स
3) अशोक नारंग, विकास शिंदे, विरनाथ कुडमुल का अरेबियन एक्सपोर्ट्स
4) मदन एबट का एम.के.आर फ्रोजन फूड एक्सपोर्ट्स
5) ओ.पी. अरोड़ा का एओबी एक्सपोर्ट्स।
क्या वे मुसलमान हैं या हिंदू? मोदी और बीजेपी हमेशा सच को क्यों तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं? मुझे बस इतना कहा था कि अगर भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बीफ़ एक्सपोर्टर है - तो बीफ़ के मुद्दे पर मुसलमानों की लिंचिंग क्यों की जाती है?"
आरोप लगते रहे हैं कि यूपी में मांस निर्यात से जुड़े कई लोग बीजेपी से जुड़े हैं। हालाँकि, इस मामले में अधिकांश जानकारी पुरानी या आरोप पर आधारित है। इस मामले में बीजेपी विधायक रहे संगीत सोम अल दुआ फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (अलीगढ़) के पूर्व डायरेक्टर थे। वह कंपनी भैंस-बकरी-भेड़ मांस निर्यात करती है। 2015 में यह बड़ा विवाद बना था, जब दस्तावेजों से उनका कनेक्शन सामने आया। हालाँकि सफाई में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 2008 में इस्तीफा दे दिया था। लेकिन 2026 में भी समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाए कि उनके कनेक्शन बने हुए हैं या मीट फैक्ट्रियां चल रही हैं। पुराने आरोप हैं कि बीजेपी को मीट निर्यात कंपनियों से चंदा मिला था। आरोपों में दावा किया गया था कि 2013-14 में 250 करोड़ का चंदा मिला था, लेकिन ये भी पुराने और विवादित आरोप हैं।
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शंकराचार्य पर विवाद

शंकराचार्य से जुड़ा यह विवाद 18 जनवरी से शुरू हुआ था। मौनी अमावस्या के दिन स्वामी जी पालकी में बैठकर त्रिवेणी संगम जा रहे थे। प्रशासन और पुलिस ने भारी भीड़ का हवाला देकर उन्हें पालकी से उतरने और पैदल जाने को कहा। इससे झगड़ा हो गया। मेला प्रशासन का आरोप था कि शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने पोंटून ब्रिज पर बैरिकेड तोड़ा और घाट की ओर बढ़े, जिससे पुलिस को स्थिति संभालने में दिक्कत हुई।

शंकराचार्य होने का सबूत मांगा था

विवाद बढ़ने पर मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया और पूछा कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का पद कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के एक लंबित केस का जिक्र था, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि अपील निपटने तक किसी को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नहीं बनाया जा सकता। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों का जवाब दिया था। बाद में अन्य शंकराचार्यों ने भी उनका समर्थन किया। 
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को माघ मेले से भारी मन के साथ वापसी की और धरना खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि संतों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और धार्मिक अधिकारों पर हमला हुआ। अब वे गोमांस निर्यात और गाय की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पहले भी गाय को 'राष्ट्र माता' बनाने और गोहत्या पर सख्त कानून की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि हिंदू भावनाओं का सम्मान जरूरी है और राजनीति को इससे अलग नहीं रखा जा सकता। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छिड़ गई है। योगी सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।