अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद पर चंपत राय के इस्तीफ़े के बीच अखिलेश यादव ने कहा है कि बीजेपी का लंका-कांड अयोध्या में ही होगा। उन्होंने कहा कि भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह’ बच नहीं पाएगा। सपा अध्यक्ष ने कहा, 'बीजेपी और उनके लोगों के काले कारनामे के अध्याय शुरू हो गए हैं'। अखिलेश ने इस बात पर भी तंज कसते हुए कहा कि 'ये सरकार तो कहती थी कि इसके राज में इस्तीफ़े नहीं होते'। इसके साथ ही नीट पेपर लीक मामले को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि NEET के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफ़े शुरू हो गए हैं तो ‘लीकाधिपति’ का भी करवा दीजिए।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की ख़बरों के बाद आई है। माना जा रहा है कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े का फ़ैसला उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद लिया गया। इस मामले में पहले ही राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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अखिलेश यादव का बीजेपी पर बड़ा हमला

इन दो इस्तीफों के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर बीजेपी को निशाने पर लेते हुए कहा, "आख़िर ‘दानभक्तों’ का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया। अब भाजपाइयों के अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और ‘लंकाधिपति’ का भी।"

उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए तो अमृतकाल काल बनकर आया है। उन्होंने आगे कहा कि अब बीजेपी के नेता और उनसे जुड़े लोग एक-दूसरे के राज खोलेंगे और जनता को सच पता चलेगा।

'इस्तीफा नहीं होता था, अब त्यागपत्र दे रहे हैं'

अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार के पुराने दावों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, "ये सरकार तो कहती थी कि इसके राज में इस्तीफ़े नहीं होते हैं। ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ से आहत जनता कटाक्ष करते हुए कह रही है कि भाजपाई कह रहे हैं कि हमने कहा था कि ‘इस्तीफ़ा’ नहीं होता, हमने इस्तीफ़ा नहीं ‘त्यागपत्र’ दिया है।"
अखिलेश ने कहा, "दरअसल अभी तो ‘भाजपाई और उनके संगी-साथियों’ के काले कारनामों, करतूतों और कारगुज़ारियों का ये प्रथम अध्याय खुला है। बँटवारे की इस लड़ाई में अब इनकी ‘पार्टी, संघ, सभा, परिषद, वाहिनी और ट्रस्ट की टोली’ एक-दूसरे की पोल खोलेगी, इससे पहले कि ये लोग चोरी के माल से भरा अपना ‘झोला-बोरा’ लेकर इधर-उधर भागें, बार्डर बंद कर दिये जाएं। अभी तो शुरुआत है, अब तो केयर फ़ंड के साथ-साथ अनरजिस्टर्ड लोगों को अपने कुकृत्यों का हिसाब भी देना होगा।"

NEET पर बोले- 'लीकाधिपति' का भी नंबर आए

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने इस मौके पर NEET परीक्षा विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि "NEET के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफों की शुरुआत हो गई है तो अब 'लीकाधिपति' का भी नंबर आना चाहिए।" यह टिप्पणी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की ओर इशारा मानी जा रही है।

'40 दिन में 70 बार लूटा'

एक अन्य पोस्ट में अखिलेश ने कहा, "हमने तो पहले ही कहा था कि CCTV का नाम ‘चढ़ावा-चोरी TV’ साबित होगा। जिन लोगों ने ‘सत्रह’ बार लूटा वो सैंकड़ों साल से इतिहास में बदनाम हैं, जिन्होंने केवल 40 दिन में ‘सत्तर’ बार लूटा वो तो इतिहास में इस महापाप के लिए ‘सात’ जन्मों के लिए काले अक्षरों में दर्ज़ हो जाएंगे। ये सोचा जाए जिन्होंने सात हफ़्ते में इतनी चोरी कर ली है, उन्होंने पिछले इतने सालों में कितना चुराया होगा, कितना आपस में बाँटा होगा, कितना चुपके से छुपाया-दबाया होगा और कितना अपने मुखिया तक पहुँचाया होगा।"

SIT जांच में क्या सामने आया?

उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। शुरुआती जांच में कई गंभीर खामियों की बात सामने आई है। जांच के दौरान जिन बिंदुओं पर सवाल उठे, उनमें शामिल हैं-
  • चढ़ावे की गिनती और निगरानी व्यवस्था में कमियां।
  • कर्मचारियों के सत्यापन में लापरवाही।
  • सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था कमजोर होना।
  • मंदिर से ट्रस्ट कार्यालय और बैंक तक चढ़ावे के परिवहन में अनियमितताएं।
  • सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियां।

आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, चोरी की संपत्ति छिपाने और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। शुक्रवार को सभी आरोपियों को अयोध्या की अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर पलटवार

उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों के बीच कहा है कि सरकार ने एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा, 'अयोध्या पर बुरी नजर मत डालिए। राम भक्तों की परीक्षा मत लीजिए। अगर किसी के पास सबूत हैं तो एसआईटी को दीजिए।' मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को नहीं छोड़ेगी।

योगी ने कहा कि सनातन आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी का मामला अब केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे बीजेपी और ट्रस्ट की जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, वहीं बीजेपी का कहना है कि सरकार ने जांच शुरू करके अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति का परिचय दिया है। अब सबकी नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिससे यह तय होगा कि इस मामले में आगे किन लोगों पर कार्रवाई होती है और क्या राजनीतिक आरोपों से आगे कोई बड़ी कानूनी जिम्मेदारी भी तय होती है।