सपा नेता आजम खान को डुअल पैन कार्ड केस में जमानत मिलने के ठीक एक दिन बाद ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। क्या उनको लगातार जेल में रखने की रणनीति है, पढ़िए आज़म ख़ान क्या बोले।
समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने और जेल से रिहा होने के ठीक एक दिन बाद फिर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस बार ED ने रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया है। अदालत ने आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उन्हें गाजियाबाद की डासना जेल में रखा जाएगा। ED का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और फंडिंग में सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय गड़बड़ियों के जरिए अपराध से अर्जित संपत्ति बनाई गई। आजम खान की कानूनी टीम ने गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया है और इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
ED की गिरफ्तारी क्यों?
आजम खान को दोहरे पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी। हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। लेकिन रिहाई के कुछ ही समय बाद ED ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।यह मामला यूनिवर्सिटी के निर्माण, उसके लिए जुटाई गई रकम और सरकारी धन के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। ED इस मामले में पहले से जांच कर रही है। एजेंसी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और वित्तपोषण में कई तरह की वित्तीय गड़बड़ियाँ हुईं और सरकारी परियोजनाओं के पैसे का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के काम में किया गया।
आजम खान की गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके साथ ही जेल प्रशासन को उनके सही इलाज और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
ED ने अदालत में क्या दलील दी?
ईडी ने अदालत में कहा कि आजम खान के पास मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ी अहम जानकारी और सबूत हैं, लेकिन वह जानबूझकर उन्हें सामने नहीं ला रहे हैं। केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक, आजम खान से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि कथित अपराध से अर्जित रकम का पता लगाया जा सके। एजेंसी यह भी जानना चाहती है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया।ED ने अदालत को बताया कि जांच में कथित धन के स्रोत, उसके इस्तेमाल और पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी यानी मनी ट्रेल का पता लगाना जरूरी है। इसके लिए आजम खान से दस्तावेजों और गवाहों के सामने पूछताछ की आवश्यकता बताई गई। यह ED की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। मामले में आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
जौहर यूनिवर्सिटी मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के स्वामित्व में है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और एजेंसी के मुताबिक, इसका नियंत्रण भी उन्हीं के पास है। इस मामले की ED जांच में जमीन की खरीद, सरकारी परियोजनाओं के लिए आवंटित धन, निर्माण कार्यों और ठेकेदारों के जरिए ट्रस्ट तक पहुंचाई गई रकम जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।
426 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है ED
ED ने 28 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों का मूल मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इनकी मौजूदा अनुमानित बाजार कीमत करीब 1170 करोड़ रुपये है। ED ने 426.46 करोड़ रुपये को कथित अपराध से अर्जित आय यानी 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' के तौर पर बताया है। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया।संपत्ति अटैच करने का मतलब है कि जांच एजेंसी ने कानून के तहत संबंधित संपत्ति पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने का फैसला नहीं है।
किसानों की जमीन जबरन लेने के आरोपों से शुरू हुई जाँच
ईडी की जाँच का आधार रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 FIR भी हैं। इन FIR में आरोप लगाया गया था कि जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन हासिल की गई। एजेंसी की जांच में सिंहानखेड़ा गांव में दुश्मन संपत्ति के 45 भूखंडों पर कथित अवैध कब्जे के आरोप भी शामिल हैं। इन भूखंडों का कुल क्षेत्रफल करीब 34 एकड़ बताया गया है। ईडी इन जमीनों के अधिग्रहण और यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए धन जुटाने के तरीकों की जांच कर रही है।ED का आरोप है कि सरकारी विकास कार्यों के लिए आवंटित धन को कथित तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण की ओर मोड़ा गया। एजेंसी के मुताबिक, सरकारी धन से होने वाली परियोजनाओं के कुछ काम यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में कराए गए। इसके अलावा सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने कथित तौर पर रकम वापस ट्रस्ट को दान के रूप में दी। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि एक ऐसी कंपनी को लोक निर्माण विभाग यानी PWD से करीब 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। आरोप है कि इस कंपनी ने ठेके की कुल रकम का 30 से 40 फीसदी हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया।
'आजम खान की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश'
आजम खान की कानूनी टीम ने ED की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि गिरफ्तारी उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई है। आजम खान के वकीलों ने उन्हें राजनीतिक साजिश का शिकार बताया है। उनका कहना है कि एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने और जेल से रिहाई के तुरंत बाद दूसरे मामले में गिरफ्तारी कई सवाल खड़े करती है।इससे पहले जेल से बाहर निकलने के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है। आजम खान ने कहा था, 'कहने को क्या है? क्या कहने को है? कहने को रहा क्या है? कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है। क्या यह मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह है कि एक मुसलमान ने विश्वविद्यालय बनाया। यही हमारा गुनाह है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए। क्या यह हमारा गुनाह है?'
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क्या लगातार जेल में रखने की रणनीति है?
आजम खान को एक मामले में जमानत मिलने के ठीक अगले दिन दूसरे मामले में गिरफ्तार किए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें लगातार जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक रूप से भी यह घटनाक्रम अहम है। आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनकी रिहाई के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी पर राजनीतिक बहस होना स्वाभाविक है।
अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। जांच में ED के आरोपों की पुष्टि होती है या आजम खान की कानूनी टीम उन्हें चुनौती देने में सफल रहती है, यह आने वाले समय में साफ़ होगा। फिलहाल, दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत के बाद भी आजम खान को जेल से बाहर रहने का मौका नहीं मिल सका है और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं।