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बाबरी ध्वंस पर फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगी बाबरी मसजिद एक्शन कमिटी

बाबरी विध्वंस मामले में सभी अभियुक्तों के बरी होने के अदालत के फ़ैसले पर मुसलिम धर्मगुरुओं ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। बाबरी मसजिद एक्शन कमेटी ने फ़ैसले को उच्च न्यायलय में चुनौती देने का एलान किया है। हालांकि अयोध्या राम मंदिर मामले में याचिकाकर्त्ता इकबाल अंसारी ने फ़ैसले का स्वागत किया है। 
बाबरी मामले में वकील रहे ज़फरयाब जिलानी ने फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है तो शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा है कि जब सभी अभियुक्त बरी हो गए हैं तो बताया जाए कि मसजिद किसने गिरायी। ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली ने कहा कि फ़ैसले का स्वागत ज़रूर है, पर इससे खुशी तो नहीं ही है। उधर अयोध्या में ज्यादातर उलेमाओं ने कहा कि इसी तरह के फ़ैसले की संभावना थी।  
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'फ़ैसले का स्वागत' 

अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मसजिद मामले के याचिकाकर्त्ता रहे हाज़ी इक़बाल अंसारी ने अभियुक्तों के बरी हो जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 'मंदिर- मसजिद का फ़ैसला 9 नवंबर को आ चुका था। 9 नम्बर के फ़ैसले को भी हमने माना, आज के भी फ़ैसले का स्वागत करते है।' इकबाल अंसारी ने कहा कि इस फ़ैसले के बाद हिन्दू-मुसलमानों का एक और विवाद ख़त्म हो गया है। 

उन्होंने कहा कि 'पहले भी हम कोर्ट का सम्मान करते थे, आज भी कर रहे हैं। हम हिंदू- मुसलमान का विवाद नहीं चाहते। इक़बाल का कहना है कि 'मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आने के बाद ही विवाद समाप्त हो चुका था और अब ध्वंस मामले के निपटने में एक साल लगा।' उन्होंने कहा कि 'अभियुक्तों में जो लोग जिंदा हैं, वे बुजुर्ग है, बहुत से लोग नही हैं। कम से कम लोगों को राहत तो मिली।'

खालिद रशीद : खुशी नहीं

बाबरी मसजिद विध्वंस मामले पर सीबीआई की विशेष अदालत में आए फ़ैसले का ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल ला बोर्ड के वरिष्ठ मेंबर मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली ने स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने इस फ़ैसले पर खुशी नहीं जताई और कहा है कि सभी को पता है 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में क्या हुआ था और इसका उल्लेख सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में भी किया गया है।

उच्च न्यायालय में अपील

बाबरी मसजिद एक्शन कमेटी के संयोजक ज़फरयाब जिलानी ने फ़ैसले पर सवाल खड़े किए हैं। जिलानी ने कहा कि बाबरी ध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फ़ैसले को इलाहाबाद उच्च न्यायलय में चुनौती देंगे। उन्होंने बाबरी ध्वंस मामले में अभियुक्तों को बरी किए जाने के सीबीआई अदालत के फ़ैसले को ग़लत बताया। जल्दी ही इस प्रकरण पर विचार करने के ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक बुलायी जा सकती है।

कल्बे जव्वाद : मसजिद गिरी कैसे?

बाबरी ध्वंस फ़ैसले पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने हैरानी जताते हुए कहा कि अगर गुंजाइश हो तो इस मामले में ऊपरी अदालत में अपील की जानी चाहिए। उन्होंने फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मसजिद पर फ़ैसला देते समय यह माना था कि उसे गिराना बड़ा ज़ुर्म और क़ानून के ख़िलाफ़ था। फिर आज यह बताना चाहिए कि बाबरी मसजिद को गिराने वाले मुज़रिम कौन हैं।

उन्होनें कहा कि मसजिद गिराने का सारा खेल पुलिस के सामने हुआ, फिर पुलिस ने उन मुज़रिमों के ख़िलाफ़ अपनी रिपोर्ट सही तरीके से क्यों नही पेश की? इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।
इसके साथ ही अहम सवाल है कि उस वक़्त की सरकार ने मसजिद गिरानों वाले के ख़िलाफ़ क्यों नहीं पुख़्ता सुबूत अदालत के सामने रखे। मौलाना जव्वाद ने कहा कि अब जबकि बाबारी ध्वंस मामले में सारे अभियुक्त बरी किए जा चुके हैं,  हमें यह तो बताएं कि मसजिद गिरायी किसने? या फिर किसी ने उसे गिराया ही नही था?

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कुमार तथागत
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