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योगी सरकार में दलितों पर क्यों बढ़ रहे हैं अत्याचार?

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार आने के बाद से दलितों पर अत्याचार की घटनाएँ लगातार बढ़ी हैं। ताज़ा वारदात में एक दलित ने आरोप लगाया है कि आगरा-कानपुर हाईवे पर मैनपुर ज़िले में उसकी मोटर साइकिल रोक कर उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया। वह इसकी रिपोर्ट लिखवाने कुरावली थाने गया तो पुलिस वालों ने उस पर झूठा मामला लिखवाने का आरोप लगाया, उससे पूछताछ की और उसी बुरी तरह पीटा। 
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पुलिस ने की पुष्टि

मैनपुरी ज़िले के पुलिस सुपरिटेंडेंट ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि शिकायत लिखवाने गए दलित की पीठ और पैर पर चोट के निशान पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मैनपुरी के बिछवाँ के थाना प्रभारी और दो कान्सटेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। लेकिन उन्होंंने महिला के साथ बलात्कार के मामले में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई है, उसके शरीर पर किसी तरह के चोट का निशान नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जाँच चल रही है, लेकिन अपहरण की बात सही लगती है। 
उत्तर प्रदेश में किसी दलित, पिछड़े या अनुसूचित जाति के आदमी पर अत्याचार होने की यह पहली घटना नहीं है। लेकिन प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद से इसमें बढ़ोतरी हुई है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को प्रदेश में बहुमत मिला और आदित्यनाथ मुख्य मंत्री चुने गए।
साल 2017 के अंत में जारी एनसीआरबी यानी नैशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक़, अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार होने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे था।
अनुसूचित जनजाति के लोगों पर सबसे अधिक अत्याचार मध्य प्रदेश में हुए। दक्षिण भारत के राज्यों में इस मामले में सबसे ख़राब रिकॉर्ड आंध्र प्रदेश का पाया गया। 

दलितों की पिटाई

तीन दिन पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें तीन दलितों को नंगा कर पीटते हुए देखा जा सकता है। इन पर चोरी करने की कोशिश करने का आरोप है। यह वारदात उत्तर प्रदेश के जौनपुर की है।

मुजफ्फरनगर

इसके पहले की एक घटना में मुजफ्फरनगर ज़िले के तुगलकपुर गाँव में अगस्त 2018 में एक ऐसा ही मामला सामने आया था। काम करने से इनकार करने पर दो दलितों की कथित तौर पर पिटाई के मामले में तीन लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया था। 

बदायूँ 

मई 2018 में बदायूँ ज़िले में वाल्मीकि समाज के एक व्यक्ति के साथ मारपीट कर उसकी मूँछ उखाड़ने और जूते में पेशाब पिलाने का मामला आया था। पुलिस के अनुसार हजरतपुर थाना के आज़मपुर गांव के सीताराम वाल्मीकि ने पुलिस को बताया था कि वह अपने खेत में गेंहू काट रहा था। ऊँची जाति के लोग चाहते थे कि वह पहले उनके खेत का गेहूं काटे। वाल्मीकि के मुताबिक़ ‘मना करने पर उन लोगों ने खेत में ही पिटाई की और गाँव ले गए और पेड़ से बांधकर उससे मारपीट की और जूते में पेशाब पिलाई।

मथुरा

मथुरा जनपद के नौहझील थाना क्षेत्र के एक गाँव में फ़रवरी 2019 में ही कुछ दबंगों ने अनुसूचित जाति की युवती की शादी में दूल्हे की बारात नहीं चढ़ने दी थी। बाद में बिना बारात चढ़ाए ही शादी हुई थी। 

ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार पहले नहीं हुए। नैशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो की 2016 में जारी रिपोर्ट में भी कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में दलितों, पिछड़ों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर अत्याचार की घटनाएँ हुई हैं।

लेकिन पिछली सरकार में इसमें बढ़ोतरी हुई है। क्या यह महत इत्तिफाक है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से दलितों और पिछड़ों पर अत्याचार की वारदात बढ़ी है? कारण जो हो, योगी सरकार को इस तरह की घटनाओं पर तुरन्त रोक लगानी चाहिए। 

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