उत्तर प्रदेश के पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में भारी दबाव के बीच चुनाव आयोग ने अब कार्रवाई की है। आयोग ने दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी CEO को दोनों अधिकारियों और संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया है। आरोप है कि 31 मई से 29 अगस्त के बीच मतदाता सूची में सुधार के लिए फॉर्म 8 के 13779 आवेदन ऑनलाइन दर्ज किए गए, लेकिन उनके समर्थन में कोई फिजिकल फॉर्म या दस्तावेज कार्यालय में मौजूद नहीं थे।
पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में यह गड़बड़ी सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने मामले की जांच की। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से मिली रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद दोनों EROs के खिलाफ निलंबन और कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया। इस मामले को पिछले महीने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने उठाया था। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 22 अक्टूबर को एक बयान जारी कर गड़बड़ी की पुष्टि की थी और कहा था कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पीलीभीत में गड़बड़ी का मामला?

यह मामला पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों में सुधार के लिए दर्ज किए गए आवेदनों से जुड़ा है। चुनाव आयोग के मुताबिक़ 31 मई से 29 अगस्त के बीच एक कंप्यूटर सहायक ने मतदाता सूची में सुधार के लिए फॉर्म 8 के कुल 13779 आवेदन दर्ज किए थे। फॉर्म 8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में सुधार, पता बदलने और कुछ अन्य बदलावों के लिए किया जाता है। लेकिन जांच में सामने आया कि इन 13779 आवेदनों के संबंध में कार्यालय में कोई भी आवेदन फॉर्म या उनके समर्थन में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। यानी ऑनलाइन सिस्टम में हजारों आवेदन दर्ज थे, लेकिन उनके पीछे जरूरी कागजी रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। इसी आधार पर चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है।
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दो EROs को तत्काल निलंबित करने का आदेश

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को लिखे पत्र में पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों- मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर उसकी प्रति जांच और आगे की कार्रवाई के लिए आयोग को भेजी जाए। आदेश में साफ़ किया गया है कि आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन अधिकारियों को दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा।

FIR का आदेश

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दोनों EROs के साथ संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ भी FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा है कि इन लोगों के खिलाफ दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 भी जोड़ी जाए। यह धारा किसी लोक सेवक द्वारा कानून के निर्देशों की जानबूझकर अवज्ञा करने से संबंधित है।
आयोग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित अदालत में मामले की पैरवी गंभीरता से की जाए और कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जाए।

एक सप्ताह में मांगी मतदाता सूची की जांच रिपोर्ट

पीलीभीत मामले में कार्रवाई के साथ ही चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूची की जांच का दायरा बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कहा है कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की दोबारा जांच कराई जाए और इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए।

राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की अच्छी तरह दोबारा जांच करने का निर्देश देने को कहा गया है। इस जांच में खास तौर पर उन बदलावों पर ध्यान देने को कहा गया है जो फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 के जरिए किए गए हैं।

फॉर्म 6 मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए, फॉर्म 7 मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए और फॉर्म 8 मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार या अन्य बदलाव के लिए है। आयोग ने निर्देश दिया है कि इन फॉर्म के जरिए नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़े डेटा की विशेष रूप से जांच की जाए।
पीलीभीत मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के सभी ERO कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के पासवर्ड निष्क्रिय करने का आदेश भी दिया है। यह कदम कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा सिस्टम के कथित दुरुपयोग की शिकायतों के बाद उठाया गया है।

कांग्रेस और सपा ने उठाया था मामला

पीलीभीत की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला पिछले महीने राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आया था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस पर सवाल उठाए थे। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निगरानी पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 22 अक्टूबर को गड़बड़ी स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।
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मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर उठे सवाल

पीलीभीत का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार करने की प्रक्रिया सीधे नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ी है। अगर किसी मतदाता के नाम या विवरण में बदलाव बिना वैध आवेदन और जरूरी दस्तावेजों के किया जाता है, तो इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
चुनाव आयोग ने अब उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में इन फॉर्म के जरिए किए गए बदलावों की दोबारा जांच करने को कहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि पीलीभीत जैसी गड़बड़ी कहीं दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में भी तो नहीं हुई।