जेफ्री एपस्टीन फाइल्स को लेकर विवाद में रहे केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा का कार्यकाल जल्द ही ख़त्म होने वाला है। विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा के लिए आई इस 8 उम्मीदवारों की सूची में तीन OBC, दो SC और 3 सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार हैं।
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए पार्टी ने 8 नए नाम घोषित किए हैं और मौजूदा राज्यसभा सांसदों में से किसी को दोबारा टिकट नहीं दिया है। इनमें केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा भी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इनमें से 8 सीटें अभी बीजेपी के पास हैं। चुनाव से कुछ महीने पहले उम्मीदवारों की पूरी सूची बदलना पार्टी के लिए अहम संगठनात्मक और राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
हरदीप पुरी, बीएल वर्मा को दोबारा टिकट नहीं
सबसे प्रमुख नाम केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का है। पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल ख़त्म होने वाला है। बीजेपी ने इस बार उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। इसी तरह केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा का नाम भी उम्मीदवारों की सूची में नहीं है। इन दोनों के अलावा अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृजलाल और गीता शाक्य भी बीजेपी की नई सूची में नहीं हैं। यानी उत्तर प्रदेश से जिन बीजेपी सदस्यों का राज्यसभा कार्यकाल ख़त्म हो रहा है, उनमें से किसी को भी इस बार उसी सीट से दोबारा मैदान में नहीं उतारा गया है।हालाँकि, किसी सांसद को राज्यसभा का टिकट न मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता है कि वह व्यक्ति पार्टी या सरकार में किसी अन्य भूमिका में नहीं रहेगा। इसलिए हरदीप पुरी या बीएल वर्मा के मंत्रिपरिषद से बाहर होने को फिलहाल केवल संभावित फेरबदल के संकेत के रूप में ही देखा जा सकता है।
बीजेपी ने किनको बनाया उम्मीदवार
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए आठ नेताओं- धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। इनमें धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि प्रकाश पाल और राम प्रताप सिंह चौहान संगठन में अहम जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं।जातीय समीकरण का भी ध्यान
बीजेपी की इस सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन दिखाई देता है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक़ इसमें तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवार हैं। सूची में दो महिलाएँ भी हैं। ओबीसी उम्मीदवारों में लोधी, पाल और कुर्मी समुदायों का प्रतिनिधित्व बताया गया है। सामान्य वर्ग से दो ब्राह्मण और एक राजपूत उम्मीदवार शामिल हैं।
ऐसे में उम्मीदवारों का चयन केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक प्रतिनिधित्व और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पार्टी के संगठनात्मक आधार को भी जगह दी गई है। बीजेपी ने इस बार दो महिलाओं को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पहला नाम प्रियंका सिंह रावत का है। वह बाराबंकी से पूर्व लोकसभा सांसद रही हैं। उन्होंने 2014 में बाराबंकी लोकसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को हराया था। दूसरा नाम श्रुति गंगवार का है। वह झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं और उत्तर प्रदेश बीजेपी से जुड़ी रही हैं।
संगठन से जुड़े नेताओं को भी मौका
बीजेपी की सूची में पार्टी संगठन में काम करने वाले नेताओं को भी जगह मिली है। प्रकाश पाल ओबीसी मोर्चा से जुड़े रहे हैं और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राम प्रताप सिंह चौहान को जून 2026 में बीजेपी के प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। अगस्त में उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया था। वहीं, धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। इस तरह सूची में सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर सक्रिय नेताओं को प्रतिनिधित्व मिला है।
विद्यासागर सोनकर पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले दलित नेता हैं। वह लोकसभा सांसद और विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं और BJP के प्रदेश संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनका नाम शामिल करके पार्टी ने अनुसूचित जाति प्रतिनिधित्व को भी सूची में जगह दी है।
विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरण
राज्यसभा का यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में संगठन के नेताओं, ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व तथा महिला चेहरों को शामिल करना पार्टी की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी के लिए राज्यसभा चुनाव में आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारना इसलिए भी अहम है क्योंकि ये सभी सीटें मौजूदा बीजेपी सदस्यों की हैं और पार्टी ने किसी भी मौजूदा सांसद को दोबारा उम्मीदवार बनाने के बजाय पूरी सूची नए चेहरों से भरी है।
क्या हरदीप पुरी का मंत्री पद भी जाएगा?
हरदीप पुरी को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद उनके केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बने रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देखा गया है।
यह ख़बर तब आई है जब हाल में मीडिया में ख़बरें आती रही हैं कि मोदी सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकती है। हालाँकि, अभी बीजेपी की ओर से यह नहीं कहा गया है कि पुरी को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटाया जा रहा है। इसलिए फ़िलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि राज्यसभा के लिए उनकी दोबारा उम्मीदवारी नहीं हुई है। उनका राज्यसभा कार्यकाल ख़त्म होने के बाद भी सरकार में उनकी भूमिका क्या होगी, यह पार्टी और सरकार के अगले फ़ैसलों पर निर्भर करेगा।
विपक्ष हरदीप पुरी को मंत्रिमंडल से हटाए जाने की मांग करता रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एपस्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी का नाम कई बार आया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि 2014-2017 के बीच उन्होंने एपस्टीन से 62 ईमेल एक्सचेंज किए और 14 मीटिंग्स हुईं। पुरी ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मुलाकातें पेशेवर और औपचारिक क्षमता में हुईं, एपस्टीन के अपराधों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर छवि धूमिल करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया।
बहरहाल, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बीजेपी की ओर से राज्यसभा के लिए घोषित यह सूची कई स्तरों पर अहम है। इसमें मौजूदा सांसदों को दोहराने के बजाय पार्टी ने संगठन से जुड़े नेताओं, राज्य सरकार के मंत्री, पूर्व सांसदों, ओबीसी और दलित समुदायों के नेताओं तथा दो महिला चेहरों को जगह दी है।
अब 16 अक्टूबर के चुनाव में इन उम्मीदवारों के नाम पर मतदान होगा। इसके बाद यह भी साफ़ होगा कि बीजेपी और विपक्षी दल राज्यसभा के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।