कानपुर पुलिस कमिश्नर पर शनिवार 23 मई को 40-50 जवान जा पहुंचे। उन्होंने पूरे दफ्तर को इस तरह घेरा, जैसे कोई बड़ा ऑपरेशन करने आए हों। सोशल मीडिया पर वीडियो फौरन वायरल हो गया। बाद में जब कमांडेंट को समझ आया तो उन्होंने इस पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मेरे साथ जवान वहां अपने साथी जवान की शिकायत लेकर गए थे। यह अस्पताल से जुड़ा मामला था। लेकिन मीडिया ने इसे बढ़ा चढ़ाकर पेश कर दिया। पूरा मामला काफी दिलचस्प है।
कानपुर की लोकल मीडिया ने इसकी रिपोर्टिंग के दौरान जानकारी दी कि स्थिति उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के करीब 40 से 50 हथियारबंद जवान और अधिकारी पुलिस कमिश्नरेट परिसर पहुंच गए। जवान अपने एक साथी कमांडो की शिकायत पर कार्रवाई न होने से नाराज थे। हथियारों और फोर्स की वर्दी में पहुंचे जवानों को देखकर परिसर में मौजूद पुलिसकर्मी भी सतर्क हो गए और माहौल करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण बना रहा।
बाद में पुलिस कमिश्नर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और ITBP अधिकारियों के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसके बाद मामला फिलहाल शांत हुआ। प्रशासन ने पूरे प्रकरण की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है।

क्या है पूरा मामला?

ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात कमांडो विकास सिंह की मां निर्मला देवी का इलाज टाटमिल चौराहे स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही हुई, जिससे उनके हाथ में इन्फेक्शन फैल गया और बाद में डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा।
इस घटना से आक्रोशित विकास सिंह 19 मई को अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे थे और अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच CMO को सौंप दी थी। CMO द्वारा गठित जांच समिति ने रिपोर्ट तो सौंपी, लेकिन उसमें किसी स्पष्ट निष्कर्ष की बात नहीं की गई और न कोई कार्रवाई हुई।
इसी से नाराज होकर ITBP के जवान और अधिकारी बड़ी संख्या में पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए और अस्पताल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस अधिकारियों ने आईटीबीपी कमांडेंट और जवानों को समझाने की कोशिश की। 
पीड़ित जवान विकास सिंह ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी मां को गलत इंजेक्शन लगाया। इसके बाद हाथ काला पड़ने लगा और सूजन तेजी से बढ़ती गई। हालत बिगड़ने पर 14 मई की शाम उन्हें बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। 17 मई को डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए, लेकिन तब तक इन्फेक्शन हाथ में फैल चुका था। इन्फेक्शन रोकने के लिए डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा। विकास सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने डॉक्टरों से कई बार पूछा कि आखिर इन्फेक्शन क्यों फैला और हाथ काटने की नौबत क्यों आई, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

ITBP अधिकारी ने लगाए गंभीर आरोप

ITBP के संपर्क अधिकारी अर्पित सिंह ने भी कृष्णा हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में इलाज के दौरान ITBP की एक महिला कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर की भी मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के खिलाफ पहले भी लापरवाही की शिकायतें मिल चुकी हैं और इसी वजह से वे स्वयं जवानों के साथ शिकायत दर्ज कराने पहुंचे हैं, ताकि अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके।

CMO ने दोबारा जांच के दिए आदेश

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मामले की पुनः जांच कराने का निर्णय लिया। CMO हरिदत्त नेमी ने बताया कि दो वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेष जांच टीम गठित की गई है। उन्होंने कहा कि टीम मौके पर जाकर पूरे मामले की गहन जांच करेगी, सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। ITBP प्रतिनिधियों से भी बातचीत की गई है और उनके कुछ सवालों के जवाब दिए गए हैं।
CMO हरिदत्त नेमी ने कहा कि पूरे मामले की SIT स्तर पर जांच की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में टीम सभी मेडिकल रिकॉर्ड, दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान जुटा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में समय लगेगा क्योंकि सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।