अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद अभी सुलझा भी नहीं है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने का आरोप लगा है। वाराणसी के एक वकील और पूर्व बार संघ महासचिव नित्यानंद राय ने यह दावा किया है। मंदिर प्रशासन ने दावों को खारिज किया है।
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अब वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर और उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर लगे स्वर्ण कलश गायब होने के आरोप सामने आए हैं। वाराणसी के अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नित्यानंद राय ने इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कई जगह शिकायत की है। उन्होंने मंदिर में सोने-चांदी के इस्तेमाल का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने और श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। हालाँकि, वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने आरोपों को ग़लत और बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि क़रीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान कलश का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था और वह सुरक्षित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में सोना गायब होने के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। वाराणसी के अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नित्यानंद राय ने आरोप लगाया है कि मंदिर के शिखर और कुछ अन्य स्थानों पर लगा सोना ग़ायब है। उनका दावा है कि मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर दो जगहों पर स्वर्ण कलश नहीं दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन स्थानों से सोना गायब होने की आशंका है, वहां रंग-रोगन कर मामले को छिपाने की कोशिश की गई।
PMO से लेकर कई अधिकारियों को लिखे पत्र
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार नित्यानंद राय ने पिछले महीने इस मामले में वाराणसी के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि इन शिकायतों पर उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा किसी अन्य जगह से जवाब नहीं मिला। राय ने दावा किया कि पीएमओ ने उनकी शिकायत पर ध्यान दिया और उनसे संपर्क कर मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी।
राय ने कहा कि मंदिर जैसे अहम धार्मिक स्थल पर सोने के इस्तेमाल और उसकी सुरक्षा से जुड़ा मामला गंभीर है। इसलिए इसकी पूरी जाँच होनी चाहिए और प्रशासन को तथ्यों के साथ स्थिति साफ़ करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंदिर के किसी हिस्से से सोना ग़ायब हुआ है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि मंदिर में सोना और चांदी कहाँ-कहाँ लगाया गया है, इसकी जानकारी लोगों के सामने होनी चाहिए।
स्वर्ण कलश गायब होने का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नित्यानंद राय ने दावा किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर दो स्थानों पर स्वर्ण कलश गायब हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। राय का आरोप है कि मंदिर के कुछ हिस्सों में सोना गायब होने के बाद वहां रंग-रोगन किया गया, ताकि इस बात पर लोगों का ध्यान न जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि मंदिर में सोने और चांदी के इस्तेमाल से संबंधित पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
मंदिर प्रशासन से श्वेत पत्र जारी करने की मांग
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने मंदिर प्रशासन से इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र यानी विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने की मांग की है।
अधिवक्ता नित्यानंद राय की मांग है कि इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि मंदिर में किन-किन स्थानों पर सोने और चांदी का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही यह भी जानकारी दी जाए कि सोना और चांदी कब लगाए गए, उनकी मात्रा कितनी है और वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है।
राय चाहते हैं कि यह पूरा ब्योरा काशी विश्वनाथ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि आम लोग इसे देख सकें। उनका कहना है कि मंदिर में चढ़ावे और कीमती धातुओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए। यदि कहीं कोई नुकसान हुआ है या किसी हिस्से को हटाया गया है, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अब तक उन्हें प्रशासन की ओर से जो जानकारी मिली है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए वह मामले की विस्तृत जांच और सार्वजनिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
मंडलायुक्त ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मंदिर से सोना गायब होने के आरोपों को खारिज किया है। उनके मुताबिक, इस मामले में सामने आ रही ख़बरें भ्रामक हैं और सोना चोरी होने का दावा सही नहीं है। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार राजलिंगम ने कहा है कि करीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर बने गुंबद या कलश का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। उन्होंने कहा कि टूटे हुए हिस्से को मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रख लिया है।प्रशासन का पक्ष है कि कलश के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित रखने और उसकी तकनीकी जांच कराने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में इसे सोना गायब होने की घटना बताना सही नहीं है।
IIT मद्रास की टीम करेगी तकनीकी जांच
मंडलायुक्त के मुताबिक़ कलश के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और उसे दोबारा स्थापित करने के लिए IIT मद्रास से संपर्क किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्थान की टीम प्राथमिक सर्वे कर चुकी है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कलश की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा का आकलन किया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार मरम्मत और पुनर्स्थापना का काम किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि बिना तकनीकी जांच के कलश को दोबारा स्थापित करना सही नहीं होगा। इसलिए पहले यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उसकी संरचना सुरक्षित है और उसे दोबारा लगाने में कोई ख़तरा नहीं है। प्रशासन के अनुसार, क्षतिग्रस्त हिस्सा मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया है। तकनीकी परीक्षण और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे फिर से स्थापित करने की कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर चढ़ावे के मामले के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर यह विवाद तब सामने आया है, जब अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मामला भी चर्चा में है। राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित गबन के मामले में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। एसआईटी जांच पूरी हो चुकी है और सितंबर में आठ आरोपियों के खिलाफ 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है। सीसीटीवी में 105 घटनाएं सामने आई हैं। राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर दोनों ही देश के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
बहरहाल, जब तक जांच के नतीजे और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं होते, तब तक सोना चोरी होने के आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल प्रशासन ने आरोपों को खारिज किया है और तकनीकी जांच के बाद कलश को दोबारा स्थापित करने की बात कही है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की मांग है कि मंदिर में सोने-चांदी से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि विवाद का स्पष्ट और पारदर्शी समाधान निकल सके।