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2017 से पहले यूपी में जालीदार टोपी वाले लुंगी छाप गुंडे घूमते थे: मौर्य

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक और विवादित बयान दिया है। मौर्य ने कहा है कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में जालीदार टोपी वाले लुंगी छाप गुंडे घूमते थे। मौर्य ने यह बयान सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी की सरकार और समुदाय विशेष को निशाना बनाकर दिया है। 

बीते कुछ दिनों में मौर्य का यह एक और बयान है, जिस पर विवाद हुआ है। कुछ दिन पहले उन्होंने ‘मथुरा की तैयारी है’ कहकर विवाद को हवा देने की कोशिश की थी। 

मौर्य प्रयागराज में व्यापारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कितने लुंगीछाप गुंडे घूमते थे। जालीदार गोल टोपी लगाए, राइफ़ल, बंदूक लिए हुए, व्यापारियों को डराने-धमकाने और जमीनों पर कब्जा करने का काम कौन करता था।” उन्होंने व्यापारियों से कहा कि वे उनकी बातों को याद रखें। 

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मौर्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी के बड़े चेहरे हैं और 2017 में वह मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे थे। उनके इस बयान के बाद साफ है कि भारतीय जनता पार्टी खुलकर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश में हैं। 

मदरसे बंद कर दूंगा

कुछ दिन पहले ही योगी सरकार के मंत्री रघुराज सिंह ने कहा था कि मदरसों से आतंकी निकलते हैं और अगर भगवान ने उन्हें मौक़ा दिया तो वे सारे मदरसे बंद कर देंगे। 

...एनकाउंटर में मारे जाएंगे

इस साल जुलाई में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने जाने-माने शायर मुनव्वर राणा को लेकर विवादित बयान दिया था। शुक्ला ने कहा था कि 1947 में जो मुसलमान इस साज़िश के तहत भारत में रुके थे कि भारत को फिर से बांटेंगे और इसके टुकड़े करेंगे, उन्हीं में से मुनव्वर राणा भी एक हैं और वे लोग जो भारतीयों के ख़िलाफ़ खड़े होंगे, एनकाउंटर में मारे जाएंगे, चाहे फिर वे कोई भी हों। 

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साफ है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के नेताओं ने खुलकर विवादित और समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाले बयान देने शुरू कर दिए हैं। 

बीजेपी ने बीते दिनों कैराना से कथित पलायन के मुद्दे को जिंदा करने की कोशिश की है जबकि उसके ही पूर्व सांसद हुकुम सिंह इसे क़ानून व्यवस्था का मुद्दा बता चुके थे। साथ ही अखिलेश के जिन्ना वाले बयान को भी बीजेपी नेता लगातार दोहरा रहे हैं। इस सबका सीधा मक़सद हिंदुओं के वोटों का ध्रुवीकरण करना है लेकिन देखना होगा कि प्रदेश की जनता हिंदू-मुसलमान के मुद्दे पर वोट देगी या फिर सरकार के कामकाज पर। 

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