राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों के बाद जो विवाद खड़ा हुआ अब उसपर राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी निष्पक्ष जाँच की मांग की है। उनसे एक दिन पहले ही अयोध्या के बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ख़त लिखकर कथित गड़बड़ी में निष्पक्ष जाँच की मांग की है। एक और बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया है कि उन्हें चंदे के कथित दुरुपयोग और चोरी के बारे में बहुत कुछ पता है, लेकिन उन्होंने कहा है कि वे अभी सच बताने की स्थिति में नहीं हैं।

राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर आ रहे ऐसे बयानों के बीच ही महंत कमल नयन दास ने गुरुवार को कहा, 'आजकल आरोप-प्रत्यारोप का माहौल है। एक पक्ष दूसरे पर आरोप लगा रहा है, वहीं जाँच करने वालों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच होनी चाहिए, ताकि सबको उस पर भरोसा बने और सच्चाई सामने आए।'
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बीजेपी नेता ने पीएम को लिखा ख़त

इस बीच, अयोध्या के बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पूर्व सपा विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि मंदिर में क़रीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये के चढ़ावे गबन हो गए हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि हर पैसा हिसाब में है।

अखिलेश यादव का हमला

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को 'चढ़ावा चोरी कांड' नाम दिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मंदिर प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि चढ़ावे गिनने का काम प्राइवेट कंपनियों को कौन सौंपता है? अखिलेश ने कहा, 'सरकार चुप है, जो संदिग्ध है। अदालत को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।' हालाँकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि पाई-पाई का हिसाब रखा गया है। चंपत राय की सफाई का जवाब देते हुए अखिलेश ने एक्स पर एक पोस्ट लिखी।
अखिलेश ने कहा, 'स्पष्टीकरण ही साफ़ नहीं है। ऐसा लगता है कि यह उनके लिए हर हफ्ते का एक सामान्य मामला है, और इतना सामान्य कि वे अब इसे ध्यान देने योग्य भी नहीं समझते। उनके चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज निराशा और हताशा से भरे हुए हैं।' उन्होंने आगे कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर स्पष्टीकरण देना चाहिए और आँकड़ों की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अखिलेश ने पोस्ट किया,
जैसे ही सभी ट्रस्टी एक साथ बैठेंगे, सच तुरंत सामने आ जाएगा, क्योंकि उनमें से हर कोई एक जैसा नहीं है। यह भी साफ़ होना चाहिए कि 40 सेकंड की सफ़ाई देने में इतने घंटे क्यों लगे, और सफ़ाई के नाम पर एक मिनट बोलना भी इतना मुश्किल क्यों हो रहा है।
अखिलेश यादव
सपा अध्यक्ष
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार की चुप्पी की तरह ही, यह सफ़ाई भी संदिग्ध थी और सिर्फ़ एक औपचारिकता लग रही थी। उनके अनुसार, इस सफ़ाई ने संदेह को और बढ़ा दिया है और सनातन समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

पीयूष गोयल का पलटवार

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश की जनता अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट को गंभीरता से नहीं लेती। कोई उनकी बात पर विश्वास नहीं करता।' गोयल ने कहा कि सपा सरकार के समय विकास नहीं हुआ, क़ानून-व्यवस्था ख़राब थी और भेदभाव की राजनीति होती थी। उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 में बीजेपी की सरकार फिर बनेगी।

'सच बोलूंगा तो मुसीबत होगी': बृजभूषण

राम मंदिर फंड को लेकर चल रहे विवाद के बीच बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया है कि उन्हें चंदे के कथित दुरुपयोग और चोरी के बारे में बहुत कुछ पता है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी वह सच बताने की स्थिति में नहीं हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने हाल ही में कहा, 'मैं बहुत कमजोर इंसान हूं। अगर मैं सच बोलूंगा तो मुसीबत में पड़ जाऊंगा क्योंकि वे बहुत ताकतवर लोग हैं। अभी मुझमें सच बोलने की हिम्मत नहीं है। जब सही समय आएगा, तो मैं बोलूंगा।' उन्होंने यह साफ नहीं किया कि 'वे' कहकर उन्होंने किन लोगों की ओर इशारा किया।

ट्रस्ट और निर्माण समिति की बैठक

रिपोर्टों के अनुसार विवाद बढ़ने के बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र मंगलवार को अयोध्या पहुंचे। वह प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट सदस्यों के साथ करीब 4 घंटे बंद कमरे में बैठक की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि बैठक में चढ़ावे के विवाद और मंदिर निर्माण कार्य पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था की समीक्षा हो सकती है।

राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स इन-चार्ज महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि लंबे समय से चढ़ावे में गड़बड़ियां हो रही थीं। उन्होंने कुछ बड़े लोगों के नाम लिए और कहा कि शिकायत करने पर उन्हें हटा दिया गया। ट्रस्ट की तरफ से इन आरोपों से इनकार किया जा रहा है, लेकिन विपक्ष लगातार जांच की मांग कर रहा है। सभी पक्ष निष्पक्ष जांच की बात कर रहे हैं।