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बाबरी मसजिद के मुद्दई इक़बाल अंसारी के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का आदेश

राम मंदिर-बाबरी मसजिद केस में बाबरी मसजिद के मुद्दई इक़बाल अंसारी के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय शूटर वर्तिका सिंह की याचिका पर जेएम द्वितीय की अदालत ने केस दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने थाना राम जन्मभूमि को आदेश दिया है कि 3 दिन के अंदर केस दर्ज कर न्यायालय को  अवगत करवाएं। 

अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज वर्तिका सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए जेएम द्वितीय ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया। वर्तिका सिंह ने धारा 156/3 के तहत जेएम द्वितीय न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें इक़बाल अंसारी पर देशद्रोह व कई अन्य मामलों में केस दर्ज करने की मांग की गई थी। 

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पूरा मामला 3 सितंबर की उस घटना को लेकर है जिसमें वर्तिका सिंह मुसलिम पक्षकार इकबाल अंसारी से राम मंदिर को लेकर बात करने पहुंची थीं। अंसारी ने वर्तिका पर कथित हाथापाई का आरोप लगा कर उनके ख़िलाफ़ पुलिस में केस दर्ज करवाया था। जिस पर पुलिस ने वर्तिका सिंह को कस्टडी में लेकर 4 घंटे तक बिठाए रखा था और लखनऊ भेज दिया था। 

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इकबाल अंसारी के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाली वर्तिका सिंह।

वर्तिका सिंह की एडवोकेट संगीता सिंह ने कहा कि अंसारी ने वर्तिका पर फर्जी आरोप में केस दर्ज कर उनका उत्पीड़न किया और वर्तिका के साथ बातचीत में देश के ख़िलाफ़ कई बाते कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तिका की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया इसलिए धारा 156(3) के तहत जेएम द्वितीय की कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर कोर्ट ने अंसारी के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।

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वर्तिका का आरोप है कि इक़बाल अंसारी मीडिया के सामने कुछ बयान देते हैं और पीठ पीछे कुछ और बोलते हैं और इनके क्रिया-कलापों की गहराई से जाँच होनी चाहिए। वर्तिका का कहना है, 'मुझ पर झूठा आरोप लगाया कि मैंने उन पर हमला किया, जबकि मेरे पास ना तो कोई असलहा था और ना ही चाकू। एक महिला उनके सुरक्षा गार्ड के रहते कैसे हमला कर सकती है? मेरे ख़िलाफ़ साजिश रच कर मुझे प्रताड़ित किया गया है।'
यह सारा मामला तब हुआ है जब अदालत में राम मंदिर-बाबरी मसजिद विवाद मामले में सुनवाई चल रही है। कुछ दिन पहले ही मुसलिम पक्ष के वकील राजीव धवन को जान से मारने की धमकी मिली थी। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने धमकी मिलने की सूचना कोर्ट को दी थी। राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उन्हें मुसलिम पक्षकारों की पैरवी नहीं करने के लिए कहा गया है कि और ऐसा करने पर जान से मारने की धमकी दी गई है।
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