ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज में दर्ज पॉक्सो और यौन उत्पीड़न के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि पुलिस गिरफ्तार करती है तो वो रोकेंगे नहीं। मामला अब तूल पकड़ गया है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मंगलवार को प्रयागराज में
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने मंगलवार को अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की याचिका दाखिल की है। यूपी में यह मामला धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक रुख भी ले रहा है। आरोप है कि राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बयान देने के बाद शंकराचार्य के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले सरकार ने उन्हें माघ मेले में स्नान से रोक दिया था। योगी उनके खिलाफ विधानसभा में बयान तक दे चुके हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी शंकराचार्य को इस तरह अपमानित किए जाने पर नाराज़गी जता रहे हैं।
मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ नाबालिग बच्चे सहित दो व्यक्तियों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर में POCSO एक्ट की धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) भी लगाई गई है। आरोपों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में यह कथित घटनाएं हुईं। हालांकि ये एफआईआर मात्र आरोप लगाने के आधार पर दर्ज की गई है, पुलिस को इस संबंध में ठोस या हल्का सबूत पेश नहीं किया गया है।
एफआईआर तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर दर्ज की गई थी। उन्होंने जिला अदालत में अर्जी दाखिल की थी, जिसके निर्देश पर POCSO स्पेशल कोर्ट ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मामले को साजिश करार देते हुए आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि उनके समर्थक और वकील खुद आगे आए और कानूनी सहायता देने की पेशकश की, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उन्होंने पुलिस से बात करने की भी बात कही है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा- "अगर पुलिस हमें गिरफ्तार करने की कार्रवाई भी करती है, तो हम उनका विरोध नहीं करेंगे। हम सहयोग करेंगे। जनता सब कुछ देख रही है... झूठ का पर्दाफाश आखिरकार हो ही जाता है। कहानी झूठी साबित होगी, अगर आज नहीं तो कल, अगर कल नहीं तो परसों। हम आपके कैमरों की पहुंच में थे। प्रयागराज में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं... उन्होंने इन्हें हर जगह इसलिए लगाया है ताकि अगर कुछ भी होता है, तो वे वॉर रूम से उस पर नज़र रख सकें और सब कुछ रिकॉर्ड कर सकें।
सीडी को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहाः शंकराचार्य
शंकराचार्य ने कहा- हमारी बस हमारे कैंप के अंदर खड़ी नहीं थी, क्योंकि हमारे खिलाफ पुलिस की बर्बरता के बाद हम कैंप में नहीं गए थे। इसलिए, इस स्थिति में, सब कुछ सीसीटीवी में कैद हो गया है... वे लड़के कभी हमारे गुरुकुल में नहीं आए, कभी पढ़ाई नहीं की और हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं है। वे हरदोई के एक स्कूल के छात्र हैं, जैसा कि मुकदमे में जमा की गई उनकी मार्कशीट से साबित होता है। तो, जब वे कभी यहां आए ही नहीं और इस जगह से उनका कोई संबंध नहीं है, तो कोई उनके खिलाफ कुछ कैसे कर सकता है? और तीसरी बात, वे यह कहकर भ्रम फैला रहे हैं कि "सीडी है" तो फिर क्यों क्या इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है?... उन्होंने कहा- ये सभी सवाल आने वाले दिनों में पूछे जाएंगे, और उन्हें इनका जवाब देना होगा... जनता को यह समझना चाहिए कि कुछ लोग सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए हिंदू वस्त्र धारण करके आए हैं। वे खुद को हिंदू कह रहे हैं। वे हिंदुओं के खिलाफ काम कर रहे हैं, लेकिन वे खुद को हिंदू साबित करके ऐसा कर रहे हैं..."
पत्रकार का सनीसनीखेज बयान
पत्रकार रमाकांत दीक्षित का मंगलवार को एक वीडियो बयान सामने आया। जिसमें उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को वे अपने घर पर थे । तीन लोग उनके पास आए और उन्होंने उन्हें अपने ही फोन से आशुतोष से बात करवाई, जिसने शंकराचार्य के खिलाफ शिकायत की है। उन लोगों ने कहा, “स्वामीजी को थोड़ा सबक सिखाना पड़ेगा” और शंकराचार्य पर आरोप लगवाने की बात करने लगे। इस पर दीक्षित ने कहा, “आप मेरी बेटियों के बारे में ऐसी बातें कैसे कह सकते हो? मैं शंकराचार्य जी से मिल चुका हूं और मैंने उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है।” दीक्षित ने बताया कि इस पर आशुतोष ने उन्हें धमकी दी, कहा कि अगर तुम हमारा साथ नही दोगे तो हमारे पास तमाम रास्ते हैं। दीक्षित ने यह सारी बात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सादे कागज पर लिखकर अपना हस्ताक्षर करके दी।
बता दें कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच पिछले कुछ महीनों में तीखा विवाद चल रहा है। यह विवाद जनवरी 2026 में माघ मेले के दौरान शुरू हुआ, जब माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर पालकी में संगम स्नान करने से रोका था। उन्होंने इसे अपमान बताया और विरोध प्रदर्शन किया। शंकराचार्य ने कुंभ मेले में हुई मौतों और अव्यवस्था का मामला लगातार उठाया था।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि "हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता" और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने शंकराचार्य पद की परंपरा का हवाला दिया और कहा कि यह आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों की पवित्र परंपरा है। योगी ने भीड़ प्रबंधन और स्टांपेड जैसी स्थिति से बचाव का मुद्दा उठाया।
यह विवाद और गहरा गया जब एक अयोध्या के एक अधिकारी ने स्वामी पर योगी का अपमान करने का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया। स्वामी ने योगी सरकार पर हमले तेज किए, जबकि योगी ने कानून के समानता और धार्मिक मर्यादा पर जोर दिया। हालांकि उस अधिकारी ने अपना इस्तीफा बाद में वापस ले लिया। वो अधिकारी खुद करप्शन के आरोपों में घिरा हुआ है।
यह नया POCSO मामला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए एक और बड़ा झटका है, जबकि जांच अब शुरू होगी। पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लखनऊ में गतिविधियां तेज हैं। सनातन धर्म समर्थक संगठन योगी और शंकराचार्य के इस विवाद को हिन्दुत्व के लिए खतरा बता रहे हैं। एक चर्चा यह भी है कि योगी के खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को दिल्ली के दिग्गज शीर्ष नेताओं का समर्थन मिला हुआ है।