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सावधान, अंतरधार्मिक विवाह कर रहे हैं तो इन लोगों से बचें!

उत्तर प्रदेश में कथित 'लव जिहाद' के इतने मामले क्यों आने लगे हैं? उन मामलों में भी जिनमें संबंधित परिवारों को पता नहीं होता फिर भी 'लव जिहाद' सामने आ जाता है। यह जानकारी आती कैसे है कि दो अलग-अलग धर्मों के युवा मिल रहे हैं या शादी कर रहे हैं? क्या मीडिया में इसकी रिपोर्टिंग बढ़ गई है या फिर मामला कुछ और है?

यह जानकर चौंक जाएँगे कि यूपी में क़रीब-क़रीब हर जगह ऐसे युवक-युवतियों पर नज़र रखी जा रही है। ये नज़र रखने वाले पड़ोसी हो सकते हैं, मकान मालिक हो सकते हैं, मंदिर के व्यवस्थापक से लेकर मैरेज रजिस्ट्रेशन अफ़सर और यहाँ तक कि वकील भी हो सकते हैं। हर स्तर पर एक ख़ुफ़िया बैठा हुआ है यानी ऐसी जानकारी देने वालों का एक पूरा तंत्र खड़ा हो गया है। 

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ऐसी जानकारी देने वालों के तंत्र की वजह से ही 'लव जिहाद' की झूठी सूचना देने के एक मामले ने भी काफ़ी ज़्यादा तूल पकड़ लिया। यूपी के कुशीनगर में मुसलिम युवक व मुसलिम युवती ने शादी की थी। लेकिन सूचना यह दी गई कि मुसलिम युवक दूसरे धर्म की लड़की से शादी कर रहा है। इस पर पुलिस पहुँच गई और मुसलिम युवक को रात भर कथित तौर पर थाने में रखा। युवक को तब छोड़ा गया जब उस मुसलिम लड़की का भाई आ गया। 

हाल ही में एक लड़की को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ था। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, थप्पड़ मारने वाली कथित तौर पर बीजेपी महिला मोर्चा की प्रतिनिधि थीं और उन्होंने 18 साल की उस लड़की को इसलिए मारा था क्योंकि वह एक मुसलिम लड़की से मिलने जा रही थी। तब उन्होंने कहा था कि धर्म की इज्ज़त मिट्टी में मिला देगी।

दरअसल, तीन साल पहले जब अलग-अलग धर्मों के युवा-युवतियों के बीच ऐसे संबंधों को रोकने के लिए घोर दक्षिणपंथी संगठनों ने शुरुआत की थी तब ऐसा जाल नहीं फैला था। लेकिन धीरे-धीरे यह नेटवर्क अब काफ़ी मज़बूत हो गया है। 

इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार का भी जोर इस ओर रहा। पिछले महीने नवंबर के आख़िर में ही योगी सरकार जबरन धर्मांतरण पर अध्यादेश ले आई।

अध्यादेश लाने से पहले योगी आदित्यनाथ ने एक नवंबर को ही 'लव जिहाद' का ज़िक्र करते हुए कहा था कि जो कोई भी हमारी बहनों की इज्ज़त के साथ खिलवाड़ करेगा उसकी 'राम नाम सत्य है' की यात्रा अब निकलने वाली है। हालाँकि उन्होंने अपने बयान में किसी धर्म का नाम नहीं लिया था, लेकिन इस बयान से उनका इशारा साफ़ था और यह भी कि इसके परिणाम क्या होंगे। हालाँकि यूपी में इस दिशा में काम पिछले एक साल से हो रहा है, लेकिन इसमें तेज़ी तब आई जब योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कहा का 'लव जिहाद' पर क़ानून लाया जाएगा।

social network to track interfaith couples amid yogi government love jihad law - Satya Hindi

माना जाता है कि ‘लव जिहाद’ पर योगी सरकार के इस रवैये से उन घोर दक्षिणपंथी संगठनों का मनोबल मज़बूत हुआ और उनके काम करने के तरीक़े भी। उनका तंत्र भी काफ़ी विस्तृत हो गया है। अब यह इतना मज़बूत हो गया है कि यह व्यवस्थित रूप से संचालित होने लगा है। दक्षिणपंथी समूहों ने 'टीओआई' से कहा कि दो स्तरों पर ऐसा हो रहा है। पहला स्तर- जब ऐसे युवक और युवती मिलना-जुलना शुरू कर देते हैं। दूसरा स्तर है जब वे शादी करने का फ़ैसला करते हैं। 

पहले स्तर पर दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े युवा व छात्र, मकान मालिक, पड़ोसी होते हैं। दूसरे स्तर पर जब वे शादी करने जाते हैं तो उन्हें मंदिर के व्यवस्थापक, मैरेज रजिस्ट्रेशन अफ़सर और वकील होते हैं।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अलीगढ़ की पूर्व बीजेपी महापौर शकुंतला भारती ने कहा, 'लोग हमारे पास उस तरह आते हैं जैसे वे डॉक्टरों के पास जाते हैं। हम उन परिवारों का समर्थन करते हैं जिनकी बेटियाँ दूसरे समुदायों के पुरुषों द्वारा फँसी हुई हैं।'

रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू स्वाभिमान की राष्ट्रीय अध्यक्ष चेतना शर्मा ने कहा, 'पहले, माता-पिता हमारे ख़िलाफ़ होते थे, लेकिन अब चीजें बदल रही हैं... जागरूकता पिछले तीन वर्षों में बढ़ गई है।' हिंदू स्वाभिमान एक दक्षिणपंथी संगठन है जो हिंदुओं को अपने सम्मान को फिर से प्राप्त करने के लिए 'मरने के लिए भी तैयार रहने को कहता है।' 

देखिए, वीडियो चर्चा, लव जिहाद- निशाने पर फिर कौन?

वह कहती हैं, 'अगर कोई लड़की मुसलिम पुरुष के साथ घूमती है तो उनके जागरूक युवा पड़ोसी हमें बताते हैं।' इस तरह वह हर साल औसतन 15 महिलाओं को 'ग़लत तरीक़े से शादी' करने से रोकती हैं। अलीगढ़ के बजरंग दल के संयोजक गौरव शर्मा और संगठन के पूर्व पश्चिम यूपी संयोजक बलराज डूंगर ने भी यही कहा - छात्रों से लेकर व्यापारियों तक यह जाल फैला हुआ है। 

डूंगर ने कहा, 'हमें बरेली के दंपति के पास जाने की ज़रूरत नहीं थी।' बरेली के एक अंतरधार्मिक दंपत्ति का ज़िक्र किया गया, जिनके मेरठ में मकान मालिक ने उन्हें सूचना दी। डूंगर और उनके साथी हर साल शादी करने से 20 से 30 अंतरधार्मिक जोड़ों को रोकते हैं।

जिन जोड़ों की पहचान जल्दी नहीं की जाती है, उन स्थानों पर मुखबिर होते हैं, जहाँ वे शादी करने के लिए तैयार होते हैं- मंदिर और अदालत। हिंदू युवा वाहिनी के मेरठ सर्कल संयोजक सचिन मित्तल ने कहा, 'हम उन मंदिरों पर नज़र रखते हैं जहाँ हिंदू लड़कियाँ शादी करने के लिए मुसलिम पुरुषों के साथ आती हैं... मंदिर के प्रबंधक हमें बताते हैं।'

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