दिल्ली और झारखंड छात्र आंदोलनों के बाद अब उत्तर प्रदेश में शिक्षा और रोजगार को लेकर जेन ज़ी ने बड़ा अभियान शुरू किया है। जेन ज़ी ने 'जस्टिस मोर्चा' बनाया जो शिक्षा, रोजगार और युवाओं के मुद्दों को लेकर राज्य भर में युवाओं को एकजुट करेगा।
जस्टिस मोर्चा ने बुधवार को यूनिवर्सिटीज़ में अभियान शुरू किया।
दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन और झारखंड में छात्रों के बड़े प्रदर्शन के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर युवाओं ने नया मोर्चा खोल दिया है। 'जस्टिस मोर्चा' नाम से बने इस मंच ने बुधवार को राज्यभर में 50 दिनों तक चलने वाले अभियान की शुरुआत की है। मोर्चे ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय और गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच पहुंचकर पर्चे बांटे और शिक्षा, रोजगार तथा युवाओं के अधिकारों पर बातचीत की। साथ ही आगे के कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई। इसका मक़सद छात्रों, बेरोजगार युवाओं, शिक्षकों और अभिभावकों को जोड़कर शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर एकजुट करना है।
विश्वविद्यालयों में छात्रों से संवाद
मोर्चे की टीम ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय, गोरखपुर विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे राज्य के कई यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों में छात्रों से मुलाकात की। इस दौरान छात्रों को संगठन के उद्देश्यों और आगे के कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। गोरखपुर विश्वविद्यालय में जस्टिस मोर्चा की टीम ने छात्रों के बीच पहुँचकर पर्चा बाँटा और शिक्षा, रोज़गार व युवाओं से जुड़े सवालों पर संवाद किया।
मोर्चे का कहना है कि यह अभियान केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं के मुद्दों पर बड़ा जनसंवाद और राज्यव्यापी संगठन खड़ा करने की दिशा में काम करेगा।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद बना नया मंच
जस्टिस मोर्चा का गठन सोमवार को लखनऊ प्रेस क्लब में किया गया था। आयोजकों का कहना है कि यह पहल दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के 36 दिन लंबे आंदोलन और उसके बाद बने माहौल से प्रेरित है।
मोर्चे का दावा है कि युवाओं के सामने शिक्षा, भर्ती और रोजगार से जुड़े गंभीर सवाल हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश में एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है।अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस से शुरू हुआ अभियान
मोर्चे ने अपने अभियान की शुरुआत 12 अगस्त यानी अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस से की है। इसके तहत राज्यभर में शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य पर लगातार संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा 20 अगस्त से 2 अक्टूबर तक गोरखपुर के चौरीचौरा से लखनऊ के काकोरी तक साइकिल यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, बेरोजगार युवाओं और सामाजिक संगठनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनी जाएंगी।
75 जिलों में पहुंचने की तैयारी
जस्टिस मोर्चा ने घोषणा की है कि अगले 50 दिनों में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान राज्य के 800 से अधिक कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में नुक्कड़ सभाएं, छात्र संवाद और जनचर्चा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मोर्चे का कहना है कि युवाओं के सामने खराब शिक्षा व्यवस्था, सरकारी संस्थानों में कमजोर सुविधाएं, बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, भर्ती में देरी और रोजगार के सीमित अवसर जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
जस्टिस मोर्चा की 10 प्रमुख मांगें
मोर्चे ने सरकार के सामने 10 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं-
- हर साल भर्ती परीक्षाओं का तय कैलेंडर जारी किया जाए।
- सभी प्रतियोगी परीक्षाएं समय पर कराई जाएं।
- सरकारी विभागों के सभी स्वीकृत खाली पदों पर जल्द भर्ती हो।
- लंबित भर्ती प्रक्रियाएं पूरी की जाएं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वापस ली जाए।
- भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया खत्म कर उम्मीदवारों को विस्तृत स्कोरकार्ड दिया जाए।
- संविदा और आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था समाप्त हो तथा 'समान काम के लिए समान वेतन' लागू किया जाए।
- निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाया जाए।
- पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों और शिक्षकों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए को ख़त्म किया जाए।
- सभी शोधार्थियों को समान फेलोशिप दी जाए।
शिक्षा और रोजगार को बनाया मुख्य मुद्दा
जस्टिस मोर्चा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और रोजगार की कमी से परेशान हैं। इसलिए शिक्षा और रोजगार को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाया जाना चाहिए। मोर्चे के अनुसार, आने वाले 50 दिनों में पूरे राज्य में युवाओं से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को जुटाया जाएगा और उन्हें सरकार तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। यूपी के जस्टिस मोर्चे का यह अभियान दिल्ली के जंतर मंतर प्रदर्शन और झारखंड में छात्रों के आंदोलन की तर्ज पर जेन ज़ी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है।
दिल्ली और झारखंड में छात्र प्रोटेस्ट
जेन ज़ी के इस प्रोटेस्ट की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेतृत्व में जंतर मंतर से हुई। इस साल जून से जंतर मंतर पर युवाओं का बड़ा आंदोलन चला। मुख्य मुद्दा था नीट सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियां। युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस से झड़पें हुईं। करीब 36 दिनों के बाद 25 जुलाई को प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने FIR वापस लेने का आश्वासन दिया, जिसके बाद सीजेपी ने आंदोलन वापस ले लिया। यह जेन जी का बड़ा सफल आंदोलन माना गया।
झारखंड छात्र प्रोटेस्ट
दिल्ली में जंतर मंतर के बाद जुलाई 2026 के अंत से रांची में छात्र जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में पेपर लीक व धांधली के खिलाफ धरने पर बैठे। वे परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जाँच की मांग कर रहे थे। कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे। सरकार ने 14वीं जेपीएससी और कुछ बैकलॉग परीक्षाएं रद्द कीं, जेपीएससी के सदस्यों ने इस्तीफ़ा दिया। फिर भी छात्र सीबीाई जाँच पर अड़े रहे। अगस्त में विधानसभा घेराव के दौरान लाठीचार्ज भी हुआ। आंदोलन अभी भी जारी है। दोनों आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर थे।