उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। ताज़ा मामला मेरठ जिले की सरधना तहसील के गांव कपसाड़ का है। यहां पर दो युवकों ने दलित महिला की हत्या कर दी और उसकी बेटी का अपहरण कर लिया। पुलिस ने दबिश देकर लड़की को हरिद्वार से बरामद करने और एक आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया। सारी घटना को सरकार की ओर से बीजेपी नेताओं को गांव में भेजकर लीपापोती की कोशिश की गई। आर्थिक घोषणाएं की गईं। मौके पर संजीव बालियान और अन्य नेता पहुंचे। लेकिन जब सपा विधायक अतुल प्रधान और उनकी पत्नी ने जाने की कोशिश की तो पुलिस ने सरकार के आदेश पर उन्हें रोक दिया। भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद और कांग्रेस के नेताओं ने शनिवार को गांव में जाने की कोशिश की लेकिन योगी सरकार की पुलिस ने इन लोगों को भी रोक दिया।
50 वर्षीय दलित महिला की अपनी 20 वर्षीय बेटी की रक्षा करते हुए धारदार हथियार से हत्या कर दी गई और बेटी का अपहरण कर लिया गया। इस जघन्य वारदात के बाद गांव में भारी तनाव का माहौल है। भारी तादाद में पुलिस तैनात की गई है। गुरुवार 8 जनवरी को सुबह करीब 8 बजे सुनीता (पति सतेन्द्र जाटव) अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही रहने वाले 22-25 वर्षीय युवक पारस सोम (जो एक स्थानीय डॉक्टर के पास कम्पाउंडर का काम करता था) और उसके साथी सुनील कुमार ने उन्हें रोका। आरोपियों ने युवती से छेड़छाड़ की कोशिश की और गलत व्यवहार किया। जब मां ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने गुस्से में आकर धारदार हथियार (गन्ना काटने वाला फरसा) से उनके सिर पर वार कर दिया। महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसके बाद आरोपी उसकी बेटी को जबरदस्ती उठाकर ले गए।
ग्रामीणों ने महिला की चीख-पुकार सुनकर उन्हें तुरंत मोदीनगर के एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया और आरोपी की गिरफ्तारी तथा बेटी की सकुशल बरामदगी की मांग की। लखनऊ जैसे सूचना पहुंची। फौरन बीजेपी नेताओं को सक्रिय किया गया। संजीव बालियान और अन्य बीजेपी नेता पुलिस सुरक्षा में गांव जा पहुंचे। लंबी बातचीत के बाद शुक्रवार शाम को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विपिन ताडा ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर हत्या, अपहरण तथा एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत दो अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरे आरोपी सुनील कुमार की तलाश के लिए 10 से अधिक पुलिस टीमें गठित की गई हैं, जो दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य जिलों में छापेमारी कर रही हैं। अब तक छह लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। गांव में भारी पुलिस बल, आरएएफ और बैरिकेडिंग के साथ सुरक्षा व्यवस्था की गई है। शनिवार शाम को मेरठ पुलिस ने दावा किया कि लड़की को हरिद्वार से बरामद किया गया और आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार किया गया।

विपक्षी नेताओं को गांव में जाने से रोका, बीजेपी नेताओं को छूट

घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों ने बताया कि कपसाड़ गांव में बीजेपी नेताओं के जाने पर रोक नहीं है। लेकिन सपा, कांग्रेस, बसपा और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के जाने पर रोक लगा दी गई। जैसे ही इन तमाम नेताओं ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग दिशाओं से बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने रोक दिया। चंद्रशेखर आज़ाद को कभी मोटरसाइकल पर लिफ्ट लेकर तो कभी पैदल दौड़ते देखा गया। इनके फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

आरोपियों पर 'बुलडोजर कार्रवाई' क्यों नहीं

आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के शनिवार को कपसाड़ दौरे के कार्यक्रम के बाद पुलिस प्रशासन हाई अलर्ट पर आ गया। चंद्रशेखर ने कहा कि मामूली घटना पर किसी मुस्लिम के पकड़े जाने पर सरकार फौरन बुलडोज़र से उसका घर गिरवा देती है। लेकिन इस घटना में अभी तक आरोपियों के घर बुलडोज़र क्यों नहीं चला। कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भी पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचा, लेकिन कपसाड़ पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इससे कुछ लोगों में आक्रोश फैल गया।
कांग्रेस कमेटी के कानूनी विभाग के अध्यक्ष अली आसिफ जामा रिजवी ने बताया कि पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल दलित परिवार से मिलने के लिए कपसाड़ गया था, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रतिनिधिमंडल में शामिल मनोज राय, आलोक कुमार, सविता गौतम और किरण शर्मा ने बताया कि वे पीड़ित परिवार को सांत्वना देने, घटना की पूरी जानकारी प्राप्त करने और कानूनी कार्यवाही में उनकी सहायता करने गए थे।
प्रशासन ने पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की सहायता दी है और परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस देने पर विचार किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि हर जल्द ही सारे अभियुक्तों को दबोचा जाएगा।