न्यूज़लॉन्ड्री ने RTI के ज़रिए तमाम आंकड़े जुटाए। लेकिन आरटीआई में न्यूज़लॉन्ड्री ने यह भी पूछा था किविज्ञापनों पर खर्च किया गया किन-किन मीडिया संस्थानों को दिया गया। इस सवाल का यूपी सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद से अपने प्रचार-प्रसार पर पानी की तरह पैसा बहाया है। न्यूज़लॉन्ड्री (Newslaundry) ने राज्य सरकार के आधिकारिक बजट दस्तावेजों के विश्लेषण से यह खुलासा किया है। योगी सरकार ने विज्ञापनों पर रोजाना औसतन ₹2.32 करोड़ खर्च किए हैं। विज्ञापन खर्च का यह आंकड़ा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के औसत खर्च को भी पीछे छोड़ देता है।
केंद्र की मोदी सरकार को पछाड़ा
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2024-25 (आठ वर्षों) के बीच विज्ञापन और प्रचार-प्रसार पर कुल ₹6,811.94 करोड़ खर्च किए। योगी सरकार का औसत इस तरह लगभग ₹2.32 करोड़ प्रति दिन बैठ रहा है। मोदी सरकार का औसतन रोजाना खर्च पिछले 11 वर्षों में विज्ञापनों पर ₹1.5 करोड़ प्रति दिन बैठ रहा है।
यदि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित ₹918.83 करोड़ के बजट प्रावधान को भी जोड़ लिया जाए, तो नौ वर्षों का कुल प्रचार बजट ₹7,730 करोड़ के पार (औसतन ₹2.35 करोड़ प्रति दिन) पहुंच जाता है।
नीचे एक तालिका दी जा रही है, जिसमें आपको साल दर साल विज्ञापनों पर हुए खर्च की जानकारी मिलेगी। ये सारी सूचनाएं आरटीआई और सरकारी दस्तावेज़ों के ज़रिए हासिल की गई हैं।
यूपी सरकार का विज्ञापनों पर खर्च
(नोट: वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वतंत्रता दिवस/गणतंत्र दिवस आयोजनों के प्रचार पर ₹1.67 करोड़, पत्रकार कल्याण कोष के लिए ₹5.38 करोड़ तथा फिल्म विकास निधि के लिए ₹15 करोड़ अलग से दिए गए थे। इसी तरह 2022-23 और 2024-25 में भी इन मदों में अलग-अलग राशियाँ आवंटित की गईं।)
सबसे बड़ा हिस्सा 'विज्ञापन और विजुअल प्रचार' की जेब में
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आठ वर्षों के खर्च का विश्लेषण करने पर सामने आया कि 83% से भी अधिक राशि केवल 'विज्ञापन तथा विजुअल प्रचार' (Advertising and Visual Publicity) पर खर्च की गई। यही वह मद है जिसके जरिए समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सरकारी धन दिया जाता है।विज्ञापन और दृश्य प्रचार: ₹5,658.16 करोड़ (कुल खर्च का 83% से ज्यादा) 2017-18 में यह ₹236.33 करोड़ था, जो बढ़कर 2024-25 में ₹1,205.06 करोड़ (अब तक का सबसे उच्च स्तर) पर पहुंच गया।
प्रकाशन (Publications): ₹896.64 करोड़, सरकारी उपलब्धियों और विकास कार्यों की बुकलेट, पैंफलेट और पुस्तकें छपवाने पर।
अन्य मद:क्षेत्र प्रचार (Field Publicity): ₹220.49 करोड़ फिल्म निर्माण: ₹20.32 करोड़ सामुदायिक रेडियो व टीवी: ₹11.46 करोड़ फोटो सेवाएं: ₹7.73 करोड़
किसको मिला यह पैसा?
RTI पर साधी चुप्पीन्यूज़लॉन्ड्री द्वारा राज्य के सूचना विभाग से आरटीआई (RTI) के तहत पूछा गया कि विज्ञापन की राशि किन-किन मीडिया संस्थानों को दी गई, लेकिन सरकार ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया। कुछ आरटीआई का कोई जवाब नहीं मिला, तो कुछ को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि इतने बड़े पैमाने पर जानकारी जुटाने में बहुत समय लगेगा।
हालांकि, 2021 में एक आरटीआई से मिले जवाब के आधार पर न्यूज़लॉन्ड्री की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि योगी सरकार ने केवल एक साल (2020-21) में टीवी न्यूज़ चैनलों को ₹160 करोड़ के विज्ञापन दिए थे। इसमें से सबसे ज्यादा ₹28.82 करोड़ मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले Network18 ग्रुप को मिले थे।
हर तरफ विज्ञापनों की भरमार: समाचार पत्रों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक
राज्य सरकार का विज्ञापन अभियान केवल सरकारी बुलेटिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जगह छाया हुआ है:
प्रिंट मीडिया (समाचार पत्र): जुलाई महीने के 29 दिनों के दौरान केवल दैनिक जागरण के लखनऊ संस्करण में 54 यूपी सरकार के विज्ञापन (3 फुल पेज, 32 हाफ पेज, 19 क्वार्टर पेज) छपे- यानी रोजाना औसतन 2 से अधिक विज्ञापन। वहीं हिंदुस्तान के लखनऊ संस्करण में इसी अवधि में 49 विज्ञापन छपे।डिजिटल मीडिया (वेबसाइट्स और ऐप्स):14 मार्च 2026 से 30 दिनों के लिए asianetnews.com और oneindia.com दोनों को ₹94.40 - ₹94.40 लाख के बैनर विज्ञापन ('स्वावलंबन उद्यम', 'यूपी में महिला सक्षम है' और 'सुपरफास्ट रफ्तार' अभियान) जारी किए गए।जनवरी 2026 में अमर उजाला की वेबसाइट पर 'मिशन शक्ति' और 'उज्ज्वला योजना' के बैनर विज्ञापनों के लिए सूचना विभाग ने ₹70.80 लाख का भुगतान किया। सरकार ने विज्ञापनों के लिए ShareChat जैसे क्षेत्रीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का भी सहारा लिया।
सूचना विभाग के अलावा अन्य विभागों का भी प्रचार पर भारी खर्च
प्रचार पर खर्च केवल सूचना विभाग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य विभाग भी स्वतंत्र रूप से अपना बजट खर्च कर रहे हैं:
उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन विभाग: आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, इस विभाग ने 2024-25 और 2025-26 के बीच प्रचार पर ₹60 करोड़ खर्च किए। इसमें से लगभग ₹12 करोड़ अकेले प्रयागराज कुंभ के दौरान प्रचार पर खर्च हुए।'YourStory' के साथ ₹70 लाख का अनुबंध: दस्तावेज़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में उद्योग निदेशालय ने स्टार्टअप/डिजिटल प्लेटफॉर्म YourStory के साथ ₹70 लाख का समझौता किया। इसके तहत:
- सभी 75 जिलों के 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) उद्यमियों और कारीगरों की 100 से अधिक कहानियों को कवर करना।
- "मेड इन यूपी" ब्रांड, विरासत और रोजगार पर वीडियो फिल्म तैयार करना।
- हस्तशिल्प और नवाचार पर 500 कॉफी टेबल बुक्स तैयार करना।
- क्षेत्रीय भाषाओं में रील्स और वीडियो फीचर्स बनाना।
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस खर्च और प्रक्रिया के संबंध में राज्य के सूचना विभाग और YourStory को सवाल भेजे हैं। उनका जवाब इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नहीं आया था।
अखिलेश ने कहा- प्रचारजीवी
यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद योगी-मोदी की डबल इंजन सरकार पर जबरदस्त हमला बोला। अखिलेश ने योगी को प्रचारजीवी कहा। अखिलेश ने न्यूजलॉन्ड्री के लिंक को एक्स पर शेयर करते हुए लिखा- जैसे अयोध्या जाने का रिकॉर्ड बनाकर भी अंततः मुख्यमंत्री जी को बदनामी के सिवा कुछ नहीं मिला वैसे ही ‘आत्म-प्रशंसा के झूठे विज्ञापनों पर 2.3 करोड़ प्रतिदिन ख़र्च करके भी मुख्यमंत्री जी को अपयश के सिवा कुछ नहीं मिला।’ लखनऊ के अग्निकांड में अपने बच्चे को खोनेवाली ‘दुखी माँ’ से किये गये मुख्यमंत्री जी के दुर्व्यवहार का वीडियो जब पूरी दुनिया में देखा गया तो लोगों को वो पुराने वीडियो भी याद आ गये जिसमें मुख्यमंत्री जी ने कोविड के दौरान एक कर्तव्यनिष्ठ ज़िलाधिकारी से अशोभनीय वार्तालाप किया था या फिर एक सत्यनिष्ठ प्रोफ़ेसर साहब व पत्रकार से दुर्वचन कहे थे।
अखिलेश ने लिखा है- मुख्यमंत्री जी का कार्यकाल सदैव इस रूप में ही इतिहास में दर्ज़ होगा कि इन्हीं के समय में अयोध्या के प्रभुराम जी के मंदिर में ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी हुई थी और आरोपियों को बचाने के लिए मुख्यमंत्री जी ने जो दोषपूर्ण SIT बनाई थी, उस पर किसी को विश्वास नहीं था और उसके बाद दिल्ली ने अपनी SIT बनाई थी। इसके अतिरिक्त विपक्ष पर झूठे मुक़दमे लगाने, बुलडोज़र के दुरुपयोग व झूठे एनकाउंटर से प्रतिशोधात्मक राजनीति करने; पीडीए पर अत्याचार, ‘हाता नहीं भाता’ के घृणास्पद सत्य; लोगों के घर, दुकान व विश्वविद्यालय तक गिराने; भ्रष्टाचार के स्वर्ण-ठोसीकरण, हिरासत में मौतों के रिकार्ड व पुलिस व अन्य प्रशासन के अपराधीकरण के लिए भी मुख्यमंत्री जी का दुशासन काल नकारात्मक रूप से दर्ज़ होगा… और हाँ डबल इंजन की टकराहट की वजह से बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी ज़रूरतों की बदहाली के दौर के रूप में भी। बिना विचार के प्रचार से कुछ हासिल नहीं होता है। मुख्यमंत्री जी अकेले में बैठकर सचेत होकर सोचें तो उन्हें ये पता चलेगा कि : ‘उनका प्रचार तंत्र ही कर रहा है उनका अंत’