बकरीद (ईद-उल-अजहा) से ठीक पहले वाराणसी में दशकों पुराने प्रसिद्ध बेनियाबाग बकरा बाजार को नगर निगम ने सील कर दिया है। भीड़भाड़ और गंदगी की शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस अचानक फ़ैसले से सैकड़ों व्यापारी और पशु विक्रेता भड़क गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि त्योहार के पीक सीजन में पहले से बिना किसी नोटिस के बाजार बंद कर दिया गया। बेनियाबाग बकरा बाजार पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और मशहूर मौसमी पशु बाजार है। यह क़रीब 40 साल से चल रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर से सिर्फ एक किलोमीटर दूर यह बाजार बकरीद से लगभग एक हफ्ते पहले खुलता है। गोरखपुर, गाजीपुर, मऊ और जौनपुर समेत आसपास के जिलों से सैकड़ों व्यापारी यहां आते हैं।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार मंडी में इस बार पूर्वांचल और अन्य जिलों के क़रीब 250 व्यापारी आए। इस मंडी का 22 लाख का टेंडर होने की बात सामने आ रही है। मंडी का टेंडर लेने वालों ने भी कहा कि अचानक ऐसा हुआ है और उन्हें कुछ बताया भी नहीं गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार ठेका लेने वाले बाबू माडल ने बताया, 'हमने स्मार्ट सिटी से ठेका लिया था, जो करीब 22 से 24 लाख का है। अचानक नगर निगम की टीम पहुंची और एक घंटे का समय देकर इसे बंद कर दिया है। हमें पहले से कोई सूचना नहीं थी इस बारे में और न ही कोई कारण बताया गया है।' व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने तो यहाँ तक मांग की कि हमें नगर निगम 2 दिन का समय दे तो हम अपने जानवर लेकर यहां से चले जाएंगे।
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वाराणसी नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल का कहना है कि बाज़ार को शुरू में चलाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में शिकायतें मिलने पर अनुमति वापस ले ली गई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'स्वच्छता और सफ़ाई से जुड़ी शिकायतें मिलने के बाद अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद बेनियाबाग बाजार की अनुमति रद्द कर दी गई।' नगर निगम ने 6000 वर्ग फुट क्षेत्र को सील कर दिया है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस बाजार को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।

व्यापारियों में ग़ुस्सा

व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें बंद करने की कोई पहले सूचना नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अचानक आकर उन्हें कुछ मिनटों में जगह खाली करने का आदेश दे दिया। स्मार्ट सिटी के जनसंपर्क अधिकारी शंखभरी नंदन सोनथलिया ने इस आरोप से इनकार किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि शुक्रवार को अनुमति रद्द कर दी गई थी और व्यापारियों को तीन दिन में बाजार खाली करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जब वे नहीं माने तो सोमवार को प्रशासन और पुलिस की टीम ने बाजार साफ कर दिया।
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कर्ज लेकर, गहने गिरवी रखकर खरीदी थीं बकरियाँ

व्यापारी भारी नुकसान का शिकार होने वाले हैं। कई छोटे व्यापारी दूसरे जिलों से पैसे उधार लेकर या गहने गिरवी रखकर बकरियां खरीदकर लाए थे। अब बिक्री नहीं हो पा रही है तो कर्ज कैसे चुकाएंगे, यह उनकी सबसे बड़ी चिंता है। एक व्यापारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो में कहा, 'हमने महंगे ब्याज पर कर्ज लिया है। अगर बकरियां नहीं बिकीं तो कर्ज कैसे लौटाएंगे?'

व्यापारियों का कहना है कि अब वाराणसी में कोई दूसरा बाजार उन्हें बकरियां बेचने की इजाजत नहीं दे रहा है। कुछ लोग मजबूरन बकरियां वापस अपने गांव ले जा रहे हैं।

मौजूदा स्थिति

बकरीद से सिर्फ एक दिन पहले बाजार बंद होने से व्यापारियों में आक्रोश और घबराहट है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत वैकल्पिक जगह देने या बाजार फिर से खोलने की मांग की है। नगर निगम का कहना है कि सफाई और भीड़ को देखते हुए यह कदम जरूरी था, जबकि व्यापारी इसे त्योहार के समय में अनुचित और अचानक कार्रवाई बता रहे हैं।
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यह मुद्दा अब स्थानीय स्तर पर गरमा गया है और व्यापारी आगे विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन से बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। बकरीद के मौके पर इस घटना ने शहर में चर्चा का विषय बना दिया है। कुछ लोग इसे प्रदेश में मुस्लिम विरोधी नफ़रत से जोड़कर देखते हैं जिसमें मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक के बाद एक फ़ैसले लिए जाने के आरोप लगते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बयानबाजी के लिए लगातार सुर्खियों में रहे हैं। लेकिन इस मामले में दूसरी वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ़ स्वच्छता का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ व्यापारियों की आजीविका और त्योहार की तैयारी प्रभावित होने का सवाल है।