इसलिए अब पांच राज्यों में भी चुनाव कराए जाएं या नहीं, आयोग देर से तारीखों की घोषणा करेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी किसी राजनीतिक दल ने अपने कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा नहीं की। अगर एक भी राजनीतिक दल ने ऐसी पहल की होती तो शायद अन्य भी करते। लेकिन हर कोई रणछोर का धब्बा लेने से बचना चाहता है।