नोएडा में महिला गिग वर्कर्स ने काम की खराब परिस्थितियों को लेकर प्रदर्शन किया। न तय समय, न बुनियादी सुविधाएं।
पिछले कुछ दिनों से नोएडा में मजदूरों के वेतन को लेकर लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच बुधवार सुबह एक नया प्रदर्शन हुआ। इस बार करीब 40 महिला गिग वर्कर्स ने सड़क पर उतरकर अपनी मांग रखी। ये महिलाएं अर्बन कंपनी के साथ काम करती हैं, जो घर पर आकर सैलून, ब्यूटी और क्लीनिंग जैसी सेवाएं देती है।
महिलाओं ने सैलरी बढ़ाने की नहीं, बल्कि तय काम के घंटे और बुनियादी सुविधाओं की मांग की। वे सेक्टर 60 के एक ट्रेनिंग सेंटर के बाहर जमा हुईं और नारा लगाए- 'आठ घंटे का काम, साप्ताहिक छुट्टी और पीने का पानी व टॉयलेट की व्यवस्था दो'।
महिलाओं की मुख्य शिकायतें क्या हैं?
- काम का समय तय नहीं: सरकार के नियमों के अनुसार दिन में 8 घंटे काम होना चाहिए, लेकिन इन महिलाओं को अक्सर 10-11 घंटे तक काम करना पड़ता है।
- छुट्टी पर भारी कटौती: अगर कोई महिला वीकेंड पर छुट्टी ले ले तो उसकी तनख्वाह से बहुत ज्यादा पैसा काट लिया जाता है। 25 साल की नेहा देवी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बताया, 'मेरी रोज की मजदूरी 833 रुपये है, फिर भी 1000 रुपये क्यों काटे जाते हैं?'
- रेटिंग और पेनल्टी का डर: ग्राहक की रेटिंग कम हुई या एक मिनट भी लेट पहुंच गईं तो पेनल्टी लग जाती है। कमाई बहुत ऊपर-नीचे होती रहती है।
- बाथरूम और पानी की समस्या: पूरे दिन एक घर से दूसरे घर जाती हैं। कई बार ग्राहक बाथरूम इस्तेमाल करने नहीं देते। नेहा देवी ने कहा, 'हमें ग्राहकों के वॉशरूम इस्तेमाल करने को कहा जाता है, लेकिन अक्सर मना कर दिया जाता है।'
- सैनिटरी पैड बदलने की समस्या: सोनाक्षी थापा ने कहा, 'हर महिला को सैनिटरी पैड बदलना पड़ता है। ग्राहक के घर में ऐसा नहीं कर सकतीं। हमें अलग सुविधा चाहिए।'
- सुपरवाइजर पहुँच से दूर: शिकायत करने पर सुपरवाइजर जवाब नहीं देते या अकाउंट डीएक्टिवेट करने की धमकी देते हैं।
- एक जगह से दूसरी जगह जाने का समय: सिर्फ 15 मिनट दिए जाते हैं, जबकि पैदल चलकर जाना पड़ता है तो कम से कम 20 मिनट लगते हैं।
कितनी कमाई होती है?
अंग्रेज़ी अख़बार के अनुसार नेहा देवी पांच महीने से काम कर रही हैं और महीने में करीब 25,000 रुपये कमाती हैं। लेकिन रेटिंग और अटेंडेंस की कटौती के बाद कई महिलाओं की कमाई घटकर 18,000 रुपये रह गई है।उत्तर प्रदेश से और ख़बरें
पिंकी कुमारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बताया कि ट्रेनिंग में कहा गया था कि कैंसलेशन करने पर पैसा नहीं कटेगा, लेकिन छोटी-छोटी बातों पर पैसे काट लिए जाते हैं। ग्राहक की शिकायत पर तुरंत अकाउंट सस्पेंड हो जाता है, जबकि मजदूर की शिकायत पर अक्सर कुछ नहीं होता।
प्रदर्शन कैसे खत्म हुआ?
सुबह के समय प्रदर्शन शुरू हुआ, लेकिन देर सुबह पुलिस पहुंची और महिलाओं को बसों में बिठाकर वहां से हटा दिया। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह प्रदर्शन एक गलत मैसेज के कारण हुआ था और यह पिछले दिनों के लगातार प्रदर्शनों का हिस्सा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अर्बन कंपनी को इस मामले में सवाल भेजे गए, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। महिलाओं का कहना है कि 'हम ज़्यादा सैलरी नहीं मांग रही हैं। हम सिर्फ सम्मानजनक काम चाहती हैं। तय समय हो, बैठने की जगह हो, पानी हो और बाथरूम हो। हम पूरे दिन सड़क पर घूमती रहती हैं, हमारा भी इंसानी हक है।'
यह प्रदर्शन नोएडा में चल रहे अन्य मजदूर आंदोलनों से अलग है। यहां महिलाएं पैसे से ज्यादा काम की गरिमा और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रही हैं।