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अब रोजगार के लिए 'युवाओं की यूपी' मुहिम शुरू, युवा महापंचायतें होंगी

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में युवाओं के मुद्दों को आगे लाने के लिए 'युवा हल्ला बोल' ने लखनऊ से 'युवाओं की यूपी' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत 12 जनवरी से युवा महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा। 'युवा हल्ला बोल' के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में 2022 के लिए 22 सवाल का पर्चा जारी किया है। उन्होंने सरकार से इन सवालों के जवाब मांगे हैं। 

युवा हल्ला बोल ने कहा है कि उनकी कोशिश है कि यूपी में चुनाव 'पढ़ाई कमाई दवाई' जैसे मुद्दों पर हो, रोजगार पर बात हो और युवाओं का एजेंडा शामिल हो। 

'युवा हल्ला बोल' की वेबसाइट के अनुसार यह देश में बेरोज़गरी के ख़िलाफ़ एक राष्ट्रव्यापी युवा आंदोलन है। वेबसाइट पर लिखा हुआ है, 'युवाओं के लिए नौकरी के अवसरों और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्ष चयन पर ध्यान देने के साथ, हम एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जहाँ प्रत्येक भारतीय राष्ट्र निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके।' मार्च 2018 में एसएससी घोटाले के ख़िलाफ़ देश भर में स्वतःस्फूर्त युवा आंदोलन के दौरान 'युवा हल्ला बोल' शुरू हुआ। यह कहता है कि 'यह न तो कोई संगठन है और न ही संगठनों का गठबंधन। यह एक आंदोलन है।'

इसी 'युवा हल्ला बोल' ने अब उत्तर प्रदेश में चुनावों से पहले युवाओं के रोजगार के मुद्दे को उठाया है। इसने कहा है कि युवाओं को रोजगार चाहिए और युवाओं के पक्ष में सरकार की नीतियाँ बननी चाहिए। 

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इसने अभियान तब तेज़ किया है जब हाल ही में योगी सरकार पर सरकारी नौकरियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा UPTET वाट्सऐप ग्रुप में प्रश्न पत्र लीक होने और फिर स्थगित होने का मुद्दा भी उठा। सपा नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पेपर लीक के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया था कि भ्रष्टाचार हुआ है।

वैसे, प्रदेश में विपक्षी दल रोजगार के मोर्चे पर सरकार के विफल रहने का आरोप लगाते रहे हैं। अखिलेश यादव ने हाल में कहा था कि योगी सरकार ने अपने घोषणापत्र में 70 रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन क्या रोजगार मिला।

युवा हल्ला बोल अब चुनाव से पहले इसी मुद्दे को उठा रहा है। इसका कहना है कि चुनाव में इस मुद्दे को उठाने का मक़सद यह है कि राजनीतिक दल युवाओं और रोजगार को मुद्दा बनाएँ। 

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युवाओं का यह संगठन युवाओं के लिए रोजगार की मांग लगातार उठाता रहा है। इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को 'जुमला दिवस' मनाया था। उस दिन 'राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस', 'मोदी रोज़गार दो' और 'जुमला दिवस' जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे थे। इन हैशटैग का इस्तेमाल करने वालों में अधिकतर युवा शामिल थे। हालाँकि कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने भी ट्वीट किया था। 

तब युवाओं ने रोज़गार मांगे थे। रिकॉर्ड बेरोज़ग़ारी की बात की थी। प्रधानमंत्री मोदी के ही रोज़ग़ार देने के वादे को याद दिलाया था। उनके बयान वाले वीडियो पोस्ट की थी। मोदी के पकोड़े तलने वाले बयान पर तंज कसे थे। डीजल-पेट्रोल-रसोई गैस की बढ़ती क़ीमतों का ज़िक्र किया था। इसके उलट बीजेपी समर्थकों ने 'हैप्पी बर्थडे मोदीजी' ट्रेंड कराकर प्रधानमंत्री के कार्यों का गुणगान किया था और उनकी छवि चमकाने की कोशिश की थी।

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