उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होकर चर्चा में आए दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ को एक अन्य मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर एक स्थानीय व्यापारी के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार व्यापारी संजीव टोंक ने 1 अक्टूबर को कोटद्वार कोतवाली में दीपक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दीपक ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका का हवाला देते हुए दीपक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत गिरफ्तार किया है। 

यह वही दीपक हैं जो इस साल जनवरी में एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में बजरंग दल के कुछ सदस्यों से भिड़ गए थे। उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मुस्लिम दुकानदार के बचाव में आए दीपक कुमार से जब हंगामा कर रहे बजरंग दल के सदस्यों ने पूछा तो उन्होंने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया था। उसके बाद से वे ‘मोहम्मद दीपक’ नाम से पहचाने जाने लगे। 
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व्यापारी संजीव टोंक की शिकायत

पौड़ी पुलिस के मुताबिक, व्यापारी संजीव टोंक ने 1 अक्टूबर को कोटद्वार कोतवाली में शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपक कुमार ने उनके साथ बदतमीजी की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की दो धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। ये धाराएँ हैं- आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करना और इस तरह उकसाना जिससे शांति भंग होने की आशंका हो।

पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच के दौरान घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों और उपलब्ध वीडियो की पड़ताल की गई। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 115 भी जोड़ी गईं। धारा 196 अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य बढ़ाने से संबंधित है, जबकि धारा 115 स्वेच्छा से चोट पहुँचाने से जुड़ी है।

पुलिस ने अपने बयान में कहा कि शुरुआती तौर पर उपलब्ध साक्ष्यों से शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज और धमकी दिए जाने की बात सामने आई है। हालाँकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

उज्जैन की मस्जिद को लेकर ऑनलाइन टिप्पणी से जुड़ा विवाद

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि व्यापारी और दीपक के बीच कथित मारपीट की घटना का संबंध उज्जैन में एक मस्जिद के कुछ हिस्से को गिराए जाने के बारे में व्यापारी की ऑनलाइन टिप्पणी से था। पुलिस ने इस टिप्पणी और उसके बाद हुए विवाद को जांच का हिस्सा बनाया है। हालाँकि, व्यापारी की टिप्पणी का पूरा विवरण या दोनों पक्षों के बीच विवाद की विस्तृत परिस्थितियाँ सामने नहीं आई हैं। इसलिए फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि ऑनलाइन टिप्पणी के बाद विवाद किस तरह बढ़ा और कथित मारपीट की पूरी घटना कैसे हुई।

पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका में की कार्रवाई

पौड़ी पुलिस ने दीपक की गिरफ्तारी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई निवारक कार्रवाई बताया है। पुलिस के बयान के मुताबिक जांच के दौरान दीपक की पूर्व में विभिन्न सामाजिक विवादों में कथित संलिप्तता की जानकारी भी सामने आई। पुलिस का दावा है कि इन विवादों से इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि उसे लोगों के इकट्ठा होने और क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बनने की आशंका से जुड़ी सूचनाएँ मिली थीं।
इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत कार्रवाई की। इस धारा के तहत पुलिस उस स्थिति में निवारक कदम उठा सकती है, जब उसे आशंका हो कि कोई व्यक्ति संज्ञेय अपराध करने की तैयारी में है और उस अपराध को रोकने का दूसरा तरीका उपलब्ध नहीं है।

कोटद्वार में पुलिस का फ्लैग मार्च

गिरफ्तारी के बाद इलाके में तनाव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने गुरुवार शाम कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया। पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखना था। पौड़ी पुलिस ने अपने बयान में कहा कि कानून अपने हाथ में लेने, धमकी देने, समाज में वैमनस्य फैलाने या शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस ने जिले में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बताया है।

मुस्लिम दुकानदार के समर्थन से आए थे चर्चा में

दीपक कुमार इस साल जनवरी में उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने कोटद्वार में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार और बजरंग दल के कुछ सदस्यों के बीच हुए विवाद में हस्तक्षेप किया था। आरोप था कि बजरंग दल के कुछ सदस्यों ने दुकानदार की दुकान के नाम में इस्तेमाल किए गए ‘बाबा’ शब्द पर आपत्ति जताई थी। इसी बात को लेकर विवाद हुआ था।
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घटना के दौरान दीपक ने अपना परिचय ‘मोहम्मद दीपक’ के रूप में दिया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और वे इसी नाम से पहचाने जाने लगे। उस समय उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनी थी, जिसने मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होकर कथित धार्मिक दबाव का विरोध किया था। अब व्यापारी की शिकायत पर उनकी गिरफ्तारी के बाद कोटद्वार एक बार फिर चर्चा में है।