मसूरी में सूफी कवि बाबा बुल्ले शाह की मजार में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। क्या यह नफ़रत से प्रेरित हिंसा का मामला है? पढ़िए, पुलिस ने कार्रवाई पर क्या कहा है?
मसूरी में मजार में तोड़फोड़ के वीडियो का स्क्रीनशॉट।
उत्तराखंड के मसूरी में 100 साल से ज्यादा पुरानी बाबा बुल्ले शाह मजार में तोड़फोड़ हुई है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हुआ है जिसमें तोड़फोड़ करती हुई भीड़ को देखा जा सकता है और नफ़रती आवाज़ को भी सुना जा सकता है। हालाँकि, इस वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मजार में तोड़फोड़ की पुष्टि हुई है। एफ़आईआर दर्ज की गई है, लेकिन इस घटना के एक दिन बाद भी इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने कहा है कि इस केस में लगाए गए भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धाराओं में गिरफ्तारी ज़रूरी नहीं है।
एक हिंदू दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों ने शनिवार शाम को कथित तौर पर बाला हिसार इलाके में स्थित बाबा बुल्ले शाह मजार में 100 साल से ज़्यादा पुरानी मानी जाने वाली दरगाह में तोड़फोड़ की। बाबा बुल्ले शाह (1680–1757) एक जाने-माने पंजाबी सूफी संत, कवि, दार्शनिक और मानवतावादी थे। वे अपनी काफियों यानी भक्ति कविताओं के लिए सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं। ये कविताएँ धार्मिक कट्टरता, जातिगत भेदभाव और अंधविश्वास को चुनौती देती हैं, जबकि प्यार, आत्म-ज्ञान और ईश्वर के साथ जुड़ाव पर ज़ोर देती हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस घटना को नफ़रत फैलाने वाला बताया है। उन्होंने वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा है, "...सूफी कवि बाबा बुल्ले शाह की मजार में कुछ लफ़ंगे गुंडों ने तोड़फोड़ की। कहाँ ले जाएँगे इस देश को नफ़रत में अंधे यह जाहिल?"
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार हिंदू रक्षक दल के राज्य प्रमुख ललित शर्मा ने रविवार को हमले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा, 'यह देवभूमि है। पाकिस्तान में जिसकी कब्र है, उसकी मजार यहां नहीं चलेगी। यह सिर्फ 100 साल पुरानी है, जबकि सनातन धर्म हजारों साल पुराना है। यह अतिक्रमण था। हमने दो दिन पहले ही घोषणा की थी कि इसे तोड़ेंगे। निजी जमीन पर भी गलत काम नहीं चल सकता।'
पुलिस ने क्या किया?
पुलिस ने घटना के बाद मजार पर सुरक्षा के लिए जवान तैनात कर दिए हैं। एक एफआईआर मसूरी थाने में दर्ज की गई है। इसमें तीन नामित लोग हरि ओम, शिवऊ और श्रद्धा और कई अज्ञात लोग शामिल हैं। लेकिन इसमें गिरफ़्तारी नहीं हुई है।एचटी की रिपोर्ट के अनुसार मसूरी सर्कल ऑफिसर मनोज असवाल ने सोमवार को बताया, 'अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई क्योंकि एफआईआर में लगाई गई बीएनएस धाराओं में गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है। आरोपी को अभी जांच अधिकारी के सामने बुलावा भी नहीं भेजा गया है। एफआईआर रविवार को दर्ज हुई और सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह में व्यस्त थे। जांच शुरू होने पर हम दोषियों की पहचान करेंगे और आगे कार्रवाई करेंगे।'
एफ़आईआर में क्या धाराएं लगाई गईं
बीएनएस की धारा 196(1)(बी) लगायी गयी है जिसमें विभिन्न धर्मों, जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने वाला काम शामिल है और इसमें अधिकतम 5 साल की सजा हो सकती है। बीएनएस की धारा 298 यानी पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपमान करना। इसमें अधिकतम 2 साल की सजा हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार एक शिकायतकर्ता अकरम खान ने बताया है कि शनिवार शाम 6:45 बजे करीब 25-30 लोग हथौड़े और लोहे की रॉड लेकर आए। उन्होंने धार्मिक किताबों को अपमानित किया और मजार की दीवार पर पेशाब किया। यह सब धार्मिक उन्माद फैलाने के इरादे से किया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें लोग जय श्री राम के नारे लगाते हुए तोड़-फोड़ करते दिख रहे हैं।
मुस्लिम संगठन नाराज
देहरादून के मुस्लिम सेवा संघ के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने कहा, 'यह गंभीर अपराध है और पहाड़ वाले शहर की सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। अगर मंगलवार तक पुलिस सख्त कार्रवाई नहीं करती तो हम मसूरी में या एसएसपी दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।'
यह घटना उत्तराखंड में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकती है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी न होने से कई लोग नाराज हैं।