मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हल्द्वानी में हुए कथित 'शुद्धिकरण' को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने FIR में जाति के आधार पर अपमान या बेइज्जती के लिए SC/ST एक्ट और समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने व जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराएँ लगाई गई हैं।
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच का हुआ 'शुद्धिकरण'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' मामले में उत्तराखंड पुलिस ने आखिरकार चार हफ़्ते बाद अब एफआईआर दर्ज कर ली है। मुक़दमे में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएँ तो लगाई गई हैं, लेकिन इसमें किसी आरोपी का नाम नहीं है। यानी पुलिस ने यह एफ़आईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ़ तौर पर हवन करने वालों को देखा जा सकता है और उन लोगों के बयान भी आए थे। यह मामला करीब एक महीने से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
तो एफ़आईआर दर्ज करने में एक महीने का समय क्यों लग गया? इसके लिए आरोप तो कई लग रहे हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि पूरे राज्य से इस मामले में क़रीब 80 शिकायतें और प्रार्थना पत्र मिले थे, इसलिए इनकी क़ानूनी पड़ताल की गई। 80 में से अकेले नैनीताल जिले से 19 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पुलिस का कहना है कि क़ानूनी समीक्षा के बाद हल्द्वानी कोतवाली में पहली औपचारिक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
किसकी शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर?
यह एफआईआर हल्द्वानी की सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार अंजू इस मामले में सबसे पहले लिखित शिकायत देने वाली व्यक्ति थीं। उन्होंने पुलिस को कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी ने बताया कि पुलिस को अलग-अलग संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से बड़ी संख्या में शिकायतें मिली थीं। सभी शिकायतों की कानूनी जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने का फैसला लिया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा के अनुसार जाति के आधार पर अपमान या सार्वजनिक रूप से बेइज्जती करने का आरोप है।एससी-एसटी एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 यानी विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने और धारा 299 यानी जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम शामिल नहीं किया गया है।
शुद्धिकरण का मामला क्या है?
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक जनसभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नामक संगठन ने उसी मैदान में सफाई अभियान चलाया और 'शुद्धि यज्ञ' आयोजित किया।
इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम इसलिए आयोजित किया गया क्योंकि मंच पर अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभा को संबोधित किया था। कांग्रेस ने इसे दलित समुदाय का अपमान और छुआछूत की मानसिकता का उदाहरण बताया।
दूसरी ओर, कार्यक्रम आयोजित करने वाले संगठन ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मैदान की सफाई, धार्मिक परंपरा के अनुसार स्थल का शुद्धिकरण करना था। संगठन ने किसी भी राजनीतिक दल से संबंध होने से इनकार किया।
शिकायत में क्या कहा गया?
एफआईआर का आधार बनी शिकायत में कहा गया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनकी सभा के बाद उसी स्थान पर 'शुद्धिकरण' कराना प्रथम दृष्टया जातिगत भेदभाव, सामाजिक अपमान और अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति हीन भावना फैलाने का प्रयास लगता है।
शिकायत में सोशल मीडिया पर वायरल एक अन्य वीडियो की जांच की भी मांग की गई है। आरोप है कि वीडियो में धार्मिक नारों को इस तरह पेश किया गया जिससे एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ नफरत और तनाव पैदा हो सकता है।
संसद से लेकर सड़क तक गूंजा मामला
इस विवाद को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम ने उन्हें छुआछूत का एहसास कराया और उनका सार्वजनिक अपमान किया गया। बाद में उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि घटना की जांच का आश्वासन दिए जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
इधर, दिल्ली में कांग्रेस के दलित सांसदों और नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल संसद मार्ग थाने पहुंचा और इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि यदि अनुसूचित जाति के शीर्ष नेता के साथ ऐसा हो सकता है तो आम दलित नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि जिस मंच पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाषण दिया, उसके बाद शुद्धिकरण कराया गया, जो कानून की नजर में छुआछूत और अपराध है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर एक दिन में दर्ज हो गई, लेकिन इस मामले में एक महीने तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
पहले राहुल गांधी पर भी दर्ज हुई थी एफआईआर
इसी विवाद में इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भी हल्द्वानी में एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने इस पूरे मामले को जातिगत रंग देकर अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं को प्रभावित किया।
इधर, वाल्मीकि समाज के लोगों ने स्थानीय पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति 'अमित वाल्मीकि' नहीं, बल्कि अमित कुमार है और उसने समुदाय की पहचान का ग़लत इस्तेमाल किया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायतकर्ता की वास्तविक पहचान सार्वजनिक करने की मांग की है। वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधिमंडल ने हल्द्वानी के स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अमित कुमार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है।
बहरहाल, अब पुलिस ने दूसरी ओर से मिली शिकायत पर कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम करने के लिए अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा दर्ज कर लिया है।वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करेंगे जांच
अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है। इस मामले की जांच आईपीएस अधिकारी जगदीश चंद्र करेंगे, जिन्हें हाल ही में आईपीएस कैडर में पदोन्नत किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों, उपलब्ध वीडियो, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य सबूतों की विस्तार से जांच की जाएगी। पुलिस ने यह भी अपील की है कि जिन लोगों ने इस मामले में शिकायतें दी हैं, वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करें।
यह मामला अब कानूनी जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि बीजेपी पहले ही आयोजन करने वाले संगठन से दूरी बना चुकी है।