दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैनी बाबू की गिरफ़्तारी से बौद्धिक एवं सांस्कृतिक जगत में ज़बर्दस्त गुस्सा है। उसने इसे बुद्धिजीवियों को कुचलने के सिलसिले की नई कड़ी बताया है। आख़िर सरकार ने क्यों हैनी बाबू को गिरफ़्तार किया है, क्या है उनका कसूर? वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट।
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























