अमित शाह हिंदी के प्रचार पर क्यों ज़ोर दे रहे हैं क्या उन्हें नहीं मालूम कि अहिंदीभाषी राज्यों के लिए बेहद संवेदनशील मसला है? क्या हिंदुत्व की राजनीति के तहत वे ऐसा कर रहे हैं? हिंदी थोपने की इस कोशिश का क्या नतीजा निकल सकता है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























