क्या मोदी-शाह को खुश होना चाहिए कि उन्होंने बृजभूषण को बचा लिया? क्या महिला पहलवानों के आंदोलन को ख़त्म करना उनकी कामयाबी मानी जा सकती है इस कामयाबी के लिए उन्होंने जो तिकड़में आज़माई उन्हें महिला खिलाड़ी और देश की महिलाएं किस तरह से देखेंगी क्या उनकी नज़रों में मोदी की साख पहले जैसी रह गई होगी अंतरराष्ट्रीय रेफरी, खिलाड़ी और संगठन जो बोल रहे हैं क्या उसे दबा सकेंगे
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























