क्या काँग्रेस नरम हिंदुत्व से उग्र हिंदुत्व की काट कर पा रही है? कमलनाथ, भूपेश बघेल और अशोक गहलौत की कोशिशें क्या बताती हैं? कहीं उसकी नरम हिंदुत्व की नीति हिंदुत्व को और भी खाद-पानी नहीं दे रही है? डॉ. मुकेश कुमार के साथ चर्चा में शामिल हैं- श्रवण गर्ग, डॉ. रविकांत, पूर्णिमा त्रिपाठी, विवेक देशपांडे-
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























