काँग्रेस अध्यक्ष की इस घोषणा ने कि मज़दूरों का ट्रेन किराया उनकी पार्टी देगी, के़द्र सरकार के मज़दूर विरोधी रवैये को बेनकाब कर दिया है। इन मज़दूरों को मुफ़्त उनके घरों तक पहुंचाने के बजाय रेल्वे उनसे किराया वसूल रही है। सरकार ये रकम राज्य सरकारों के सिर पर डालने की फ़िराक़ में है जबकि वे ज़बरदस्त आर्थिक संकट से गुज़र रही हैं। सरकार सेंट्रल विस्ता जैसे प्रोजेक्ट पर फ़िजूलखर्ची छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं है जबकि ग़रीब तबकों पर ऐसे समय में भी बोझ डालने बाज नहीं आ रही।
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।

























