हर्ष मंदर या रवीश कुमार, हमारे समाज में विलेन क्यों हैं? क्यों हमने समाज में एक-दूसरे के लिये नफ़रत के ऐसे पहाड़ पाल लिये हैं कि सदियों पुराना साथ चुभने लगा है। क्यों हम समाज में किसी को इसलिये निशाने पर ले लेते हैं कि उसकी संख्या कम है या उसका विचार हमारे विचार से मेल नहीं खाता। ऐसे ही तल्ख सवालों को पेश कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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