अमेरिकी ग़ैर-सरकारी संगठन की एक रिपोर्ट आई है कि लोकतांत्रिक मूल्यों व आज़ादी सूचकांक में भारत फिसल गया है। किस वजह से भारत की ख़राब हुई स्थिति? क्या सरकार के कामकाज, इसकी पारदर्शिता, क़ानून व्यवस्था, बहुलतावाद और आस्था व अभिव्यक्ति की आज़ादी के मामले में गिरावट आई है? देखिए वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट।
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























