कल रात की घटनाओं ने ग़ाज़ीपुर बार्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन को संजीवनी दे दी है । हज़ारों किसानों ने कल रात से आज तक यहाँ दबिश दी । कल उखड़ गये टेंट आज फिर लग रहे हैं और आये हुए किसान रात यहीं बिताने की मंशा रखते हैं , शीतल पी सिंह की रिपोर्ट
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













.jpg&w=3840&q=75)










