तेलंगाना हाईकोर्ट ने नफ़रत फैलाने वाली सामग्री को प्लेटफॉर्म देने के लिए ट्वीटर को फटकार लगाई है। लेकिन मामला केवल ट्विटर तक सीमित नहीं है सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी यही हो रहा है। दिक्कत ये है कि जब सरकार सोई हुई है तो कौन रोकेगा? इसे वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























