सुप्रीम कोर्ट के रंग ढंग पर लगातार उँगलियाँ उठ रही हैं। कहा जा रहा है कि वह सरकार के दबाव में काम कर रहा है, उसके हिसाब से फ़ैसले दे रहा है। ये आरोप भी न्यायिक क्षेत्र के ही लोग लगा रहे हैं। पूर्व जस्टिस मदन लोकुर भी सुप्रीम कोर्ट से निराश हैं और चाहते हैं कि वह आत्म निरीक्षण करे। मगर वह ऐसा करेगा क्या?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























